बहराइच : कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में वास कर रहे बाघों के संरक्षण व कुनबे में बढ़ोतरी को लेकर विश्व बाघ दिवस के मौके वन विभाग ने विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। प्रभागीय वनाधिकारी आकाशदीप वधावन के नेतृत्व में कतर्नियाघाट ईको अवेयरनेस सेंटर तक पांच किलोमीटर साइकिल व पैदल यात्रा कर लोगों को बाघों की सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।

वन विभाग की टीम ने नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी के जवानों के साथ सीमा से सटे जंगलों व नो-मेंस लैंड पर लांग पेट्रोलिग की, जिसमें कतर्नियाघाट, धर्मापुर, निशानगाड़ा, मुर्तिहा, सुजौली रेंज के वनकर्मी शामिल रहे। गश्त के दौरान ड्रोन कैमरे की सहायता भी ली गई, जिससे बाघों की सुरक्षा का जायजा लिया गया।

कतर्नियाघाट ईको अवेयरनेस सेंटर पर कार्यशाला का आयोजन हुआ, जिसका संचालन वन क्षेत्राधिकारी रामकुमार ने किया। डीएफओ ने बताया कि कतर्नियाघाट में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए किए जाने वाले सुरक्षा के इंतजाम पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक वन संपदा और बेहतर जलवायु से 551 वर्ग किलोमीटर में फैले वन्यजीव प्रभाग में अधिक संख्या में बाघ पाए जाते हैं। निरंतर बाघों की संख्या बढ़ रही है। बाघों की सुरक्षा को लेकर विभिन्न रेंजों से 16 टीमें गठित की गई हैं।

डीएफओ ने बाघों के संरक्षण व जंगल सुरक्षा के लिए बेहतर कार्य कर रहे 17 वन कर्मियों को प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया। आयोजन में एसएसबी, एसटीपीएफ, एसओएस टाइगर, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ व कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब की टीम शामिल रही। इस मौके पर एसओएस टाइगर के अध्यक्ष फैज मोहम्मद, कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब के अध्यक्ष भगवानदास लखमानी, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी दबीर हसन, पशु चिकित्सक डा. वीरेंद्र वर्मा, रेंजर मिथिलेश राजपूत, दयाशंकर, इरफान खान, अशोक त्यागी, रविद्र यादव, वन दारोगा मयंक पांडेय, शरीफ अहमद, पवन शुक्ल, अन्नू शुक्ल, अनिल कुमार, हीरालाल यादव, मनोज पाठक, आलोकमणि त्रिपाठी,यमुना विश्वकर्मा, अमित श्रीवास्तव मौजूद रहे।

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