बहराइच : दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के हत्थे चढ़ा आतंकी नेटवर्क का अहम किरदार अबू बकर कुछ माह पहले ही देवबंद सहारनपुर से आलिम की डिग्री लेकर अपने गांव आया था। वह कैसरगंज कोतवाली क्षेत्र के ग्राम प्यारेपुर का निवासी है।

जाहिरा तौर पर वह सोनारी चौराहा पर मकान व दुकान बनवाकर कारोबार करना चाहता था। बीते नौ सितंबर को वह अपने घर से दिल्ली जमात में शामिल होने गया था। अब खुफिया एजेंसी उसकी एवं उसके मिलने वालों की कुंडली खंगाल रही हैं। उसके मिलने वालों के नंबर सर्विलांस पर लिए गए हैं।

उसके पिता सुन्ना उर्फ मोहम्मद खालिद पिछले 35 वर्षों से सऊदी अरब में रहकर मदरसे में पढ़ाते हैं। इसके अलावा उनका वहां व्यवसाय भी हैं। 2013 में अबू बकर अपनी मां व भाई के साथ सऊदी अरब से वापस आकर देवबंद में रहने लगा। वर्ष 2018 में आलिम की डिग्री हासिल की। 2018 में उसकी शादी अयोध्या जिले के मवई में हुई। उसकी तीन माह की एक बेटी भी है। कुछ माह पहले ही वह अपने पैतृक गांव आया और सोनारी चौराहे पर अपने चाचा के टेंट हाउस पर रहने के साथ पैतृक भूमि पर दुकान व मकान का निर्माण कराने लगा। हालांकि यहां उसका साबका स्थानीय लोगों से कम ही रहा, ऐसे में कभी उसकी संदिग्ध गतिविधि की भनक आम लोगों तो क्या पुलिस को भी नहीं लगी।

पूछताछ के बाद एटीएस ने भाई को छोड़ा

मंगलवार को कैसरगंज पहुंची एटीएस टीम ने भाई मुहम्मद उमर को थाने लाकर पूछताछ की। तकरीबन तीन घंटे की गहन पूछताछ के बाद उसे हिदायत देकर छोड़ दिया। कोतवाल मधुपनाथ मिश्र ने बताया कि अबू बकर कभी-कभार ही यहां आता था। वह अक्सर जमात में ही रहता था। उसकी गिरफ्तारी होने के बाद पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।

मां-भाई को नहीं हो रहा राष्ट्रविरोधी गतिविधि में शामिल होने का भरोसा

उसकी मां नसरीन जहां एवं छोटे भाई मुहम्मद उमर को राष्ट्रविरोधी गतिविधि में शामिल होने का भरोसा ही नहीं हो रहा है। उमर ने कहा कि हमारा भाई निर्दोष है। जांच एजेंसियां निष्पक्ष जांच करा लें। नसरीन जहां ने कहा कि हमें अपने वतन से प्यार है। बेटे को आतंकवादी करार देना गलत है।

Edited By: Jagran