बागपत, जेएनएन। मैगसेसे पुरस्कार प्राप्त जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि समय रहते हम पर्यावरण का लेकर नहीं चेते तो दुष्परिणाम भयावह होंगे। उन्होंने बड़ौत में प्रेस वार्ता में कहा कि जल-जंगल और जमीन बचाने के लिए हर किसी को आगे आना चाहिए। यदि जल-जंगल और जमीन नहीं बचाई तो हमारा जीवन नहीं बचेगा। जिस तरह से हम पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं उससे तेजी से जलवायु में परिवर्तन हो रहा है। इससे कहीं सूखा तो कही बाढ़ तबाही मचा रही है।

भूजल खत्‍म होने के कगार पर

उन्होंने कहा कि गंगा और यमुना दोआब में बसे पश्चिम उप्र में भी जल संरक्षण के लिए गोष्ठियों का आयोजन करना पड़ रहा है। इससे बड़ी विड़ंबना और क्या होगी? अब जनता सरकार के भरोसे न रहकर अपनी आदतों में सुधार करना होगा। यदि हम नहीं चेते तो फिर पानी को लेकर घमासान मचेगा। आज एनसीआर समेत देश के 21 शहर जीरो डे के कगार पर हैं। यानी इनका भूजल खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है। एक तरफ पानी बचाने की बात करते हैं तो दूसरी तरफ भूजल का अतिदोहन कर रहे हैं। जल परंपरागत स्रोतों को जीवित कर उन्हें प्रदूषण से बचाना होगा। 

Posted By: Prem Bhatt

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