बागपत, जेएनएन। बैंकों ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर भारत योजना पर ब्रेक लगा दिया है। 'संकल्प से सिद्धि की ओर' का सपना साकार करने को 1401 रेहड़ी-पटरी पर कारोबार करने वालों को 15 अगस्त तक 20-20 हजार रुपये कर्ज देने का लक्ष्य है, लेकिन आज तक एक गरीब को भी कर्ज नहीं दिया गया। इस नाकामी की गूंज अब लखनऊ तक पहुंच गई, लेकिन बैंकों की सेहत पर कोई असर पड़ता नजर नहीं आ रहा है।

कोरोना से कारोबार धड़ाम हो गए। इससे आई आर्थिक मंदी की सर्वाधिक मार गरीबों पर पड़ी। सरकार ने गरीबों को सहारा देने को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर भारत योजना से रेहड़ी-पटरी पर कारोबार करने वाले 5784 लोगों को बिना गारंटी 10-10 हजार रुपये कर्ज दिलाया। इस कर्ज को चुकाने वाले 1401 व्यक्तियों को 15 अगस्त तक 20-20 हजार रुपये कर्ज देने का लक्ष्य दिया हुआ है, लेकिन एक व्यक्ति को भी कर्ज नहीं दिया गया।

डूडा की परियोजना निदेशक रजनी पुंडीर ने बताया कि मंगलवार को सूडा निदेशक यशो रस्तोगी व अपर निदेशक आलोक सिंह ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग कर कर्ज वितरण की समीक्षा की, जिसमें उन्हें बताया गया कि 1401 पात्र लोगों का डाटा पोर्टल पर अपलोड कर दिया है, लेकिन बैंक अफसर कर्ज नहीैं दे रहे हैं। लोग बैंकों में चक्कर लगाते थक चुके हैं। जिन्होंने 10-10 हजार रुपये कर्ज चुका दिया, उन्हें बैंक इसलिए नो ड्यूज सर्टिफिकेट नहीं दे रहे हैं, ताकि वे 20-20 हजार रुपये का कर्ज पाने को आवेदन न कर पाएं। सूडा निदेशक लखनऊ ने कर्ज वितरण नहीं करने पर बैंकों के खिलाफ शासन को लिखने का आश्वासन दिया है।

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