बागपत, जेएनएन। पकड़े गए नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन कहां बने रहे थे। इसका अभी तक राजफाश नहीं हुआ है। इस मामले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग ने इंजेक्शन पर लगे रेपर के आधार पर तेलंगाना की कपनी को नोटिस भेजकर जानकारी की तो कंपनी ने अपने इंजेक्शन होने से इन्कार कर दिया। पकड़े गए तीन आरोपितों से भी पुलिस और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम अभी तक कोई जानकारी नहीं जुटा पाई है।

बागपत कोतवाली पुलिस ने राष्ट्रवंदना चौक पर एक गाड़ी से गत 19 मई को 60 इंजेक्शन रेमडेसिविर बरामद किए थे। आरोपित मनमोहन व उसका बेटा मुकंद निवासी गांधी कालोनी, नई मंडी जिला मुजफ्फरनगर व बिशन निवासी सलेमपुर चौक रानीपुर जिला हरिद्वार (उत्तराखंड) को गिरफ्तार किया था, जो 14 मई को पंजाब के जीरकपुर नगर की वेदांग ट्रेडिंग कंपनी एवं स्टोर मालिक सुखपाल चौहान उर्फ एसपी चौहान से 92 इंजेक्शन खरीदकर मुजफ्फरनगर लाए थे। 32 इंजेक्शन विशाल (मनमोहन के दूसरे बेटे) ने बेच दिए थे। 60 इंजेक्शन को सप्लाई करने के लिए वे दिल्ली जा रहे थे। पुलिस दो सप्ताह पूर्व सुखपाल को भी गिरफ्तार कर चुकी है। उधर, लखनऊ की लैब से नमूनों से राजफाश हुआ था कि इंजेक्शन नकली हैं। जिन पर तेलंगाना की कंपनी का रेपर लगा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने कंपनी को नोटिस भेजा था, ताकि इंजेक्शन के बारे में जानकारी प्राप्त हो सके। ड्रग इंस्पेक्टर वैभव बब्बर का कहना है कि उक्त इंजेक्शनों को कंपनी ने अपने होने से इन्कार किया है। हालांकि इस संबंध में कंपनी की अभी हार्ड कापी प्राप्त नहीं हुई है।

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