42 से उछलकर 65 प्रति रुपये प्रति किलोग्राम हुए चीनी के दाम, उपभोक्ताओं और व्यापारियों की बढ़ी चिंता
Baghpat News: चीनी की कीमतें दो हफ्तों में 42 रुपये से 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गईं, जिससे त्योहारों से पहले उपभोक्ताओं और व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है।

HighLights
चीनी की कीमतें दो हफ्तों में 42 से 65 रुपये प्रति किलो।
त्योहारों से पहले उपभोक्ताओं, व्यापारियों का बजट बिगड़ा।
संवाद सूत्र, बड़ौत (बागपत)। चीनी की कीमतों में दो हफ़्तों में दर्ज की गई भारी बढ़ोतरी ने त्योहारों से ठीक पहले उपभोक्ताओं व मिठाई-बेकरी कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। खुदरा बाजार में चीनी के दाम 42 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर को पार करते हुए 65 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं।
व्यापारियों का मानना है कि गन्ने की कम पैदावार, खराब मौसम और आगामी पर्व-त्योहारों के कारण बढ़ी मांग को इस तेजी की मुख्य वजह माना जा रहा है। वहीं अधिकांश व्यापारियों व आम नागरिकों का मानना है कि एथनोल बनाने के कारण चीनी की कमी हुई है। लोगों का मानना है कि वर्षों में आमतौर पर 1 या 2 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बढ़ने वाले चीनी के दाम में इस बार महज पंद्रह दिन के भीतर ही 23 रुपये प्रति किलोग्राम का बड़ा उछाल देखा गया है।
42 रुपये किलोग्राम से सीधे 65 रुपये प्रति किलो पहुंची चीनी ने बाजार से लेकर रसोई तक का बजट बिगाड़ दिया है। प्रमुख गन्ना और चीनी उत्पादक क्षेत्र के परिप्रेक्ष्य में इस मूल्य वृद्धि का विभिन्न वर्गों पर प्रभाव पड़ा है। 15 दिन में चीनी के दाम में हुई वृद्धि ने जहां आम आदमी की कमर तोड़ कर रखती है।
वही फुटकर व्यापारी से लेकर थोक व्यापारी भी इससे प्रभावित हुआ है। शहर की अजितनाथ मंडी से रोजाना 400 कुंतल चीनी का उठान होता था। जो अब घटकर आधा यानी 200 कुंतल पर सिमट गया है। श्री अजितनाथ ट्रेडिंग कंपनी के संचालक अनिल जैन ने बताया शीरे के द्वारा तैयार किए गए इथेनाल में चीनी का प्रयोग किया जा रहा है।
जिसके चलते चीनी का उत्पादन आवश्यकता से कम पड़ रहा है। इसी के चलते चीनी के दाम अचानक से इतने बढ़ गए हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले केवल वर्ष 2016 के आसपास चीनी के रेट 3000 रुपये प्रति कुंतल से बढ़कर 5500 रुपये प्रति कुंतल हुए थे। हालांकि कुछ समय बाद वह फिर से 3200 रूपये प्रति कुंतल हो गए थे। चीनी के दामों में इतनी वृद्धि ने व्यापारियों व आम लोगों की कमर को तोड़ने का काम किया है।
थोक उठान में सुस्ती थोक मंडियों से चीनी का दैनिक उठान सुस्त पड़ गया है। व्यापारी ऊंचे दामों के कारण बड़ा स्टाक खरीदने से परहेज कर रहे हैं। दुकानदारों की पूंजी सीमित हो गई है। पहले जहां 4,200 रुपये में एक क्विंटल चीनी आती थी,अब उसके लिए 6500 रुपये खर्च हो रहे।
गृहणी मीनाक्षी ने कहा कि रसोई का मासिक बजट बिगड़ गया है। चाय, मिठाइयों और दैनिक खान-पान पर प्रति परिवार खर्च सीधे बढ़ गया है। जिसका असर उनके परिवार के दैनिक बजट को प्रभावित करेगा।
व्यापारी मांगेराम जैन ने बताया कि अचानक 20 रुपये प्रति किलो दाम बढ़ने से ग्राहकों से बहस की स्थिति बनती है, जिससे फुटकर चीनी की बिक्री की मात्रा घटी है। ग्राहकों को पुरानी दरों पर ही सामान या उधारी देने का दबाव है, जिससे उनका लाभ घट रहा है।
नितिन शर्मा ने कहा कि घर में बनने वाली मिठाई की लागत बढ़ गई है। इससे त्योहारों पर बनने वाली खाद्य वस्तुओं का खर्च बढ़ा है।
