क्या है स्पॉन्सरशिप योजना, जो बन रही बेसहारा बच्चों का सहारा, ये है आवेदन का पूरा प्रोसेस
Baghpat News: भारत सरकार की स्पॉन्सरशिप योजना के तहत बेसहारा बच्चों को हर माह 4,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
पिता गया जेल, बेटा पहुंचा स्कूल और बालिका वधू ने थामी किताब।
बागपत में 752 बच्चों को मिल रही हर माह चार हजार की मदद।
जहीर हसन, बागपत। भारत सरकार की स्पाॅन्सरशिप योजना बेसहारा बचपन संवारने को मील का पत्थर साबित हो रही है। इस योजना से सड़कों पर कबाड़ बीनने वाले, बाल श्रमिक, बालिका वधू बनने से बचाई गईं बेटियों, अनाथ बच्चों को प्रत्येक माह चार हजार रुपये दर से आर्थिक सहायता मिलती है।
बागपत में 752 बच्चों को पढ़ाई-लिखाई तथा भरपेट भोजन आदि खर्च के लिए हर साल 3.61 करोड की आर्थिक सहायता मिल रही है। यदि कोई बच्चा संकटग्रस्त जीवन जीने को मजबूर हो तो आप उसकी मदद कर योजना का लाभ दिला बेहतर कल के निर्माण में महत्ती भूमिका निभा सकते हैं।
स्पॉन्सरशिप योजना का जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में जीवनयापन करने वाले परिवारों के बच्चों तथा अनाथ बच्चों की उचित देखभाल एवं अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सहायता करना उद्देश्य है। एक से 18 वर्ष आयु के पात्र बच्चों को भारत सरकार की ओर से 4,000 प्रति माह की आर्थिक मदद दी जाती है। यह पैसा सीधे बच्चे व उसकी देखभाल करने वाले अभिभावक के संयुक्त बैंक खाते में भेजा जाता है।
बागपत में 752 बच्चों को हर माह 30.08 लाख और साल में कुल 3.61 करोड़ रुपये मिल रहे। इनमें 10 बेटियां ऐसी हैं, जिन्हें बाल विवाह से मुक्त कराकर स्कूलों में नामांकित कराया गया तथा अब वे अपना भविष्य बेहतर बनाने को दिन रात पढ़ाई में जुटीं नजर आती हैं। अधिकांश बच्चे ऐसे हैं, जिनके माता या पिता की मौत हो गई। जेल में बंद माता या पिता के भी कई बच्चों का इस योजना से भविष्य संवार रहा है। यदि
इन्हें मिलता है योजना का लाभ
अनाथ बच्चे, तलाकशुदा मां के बच्चे, मां या पिता में कोई एक जानलेवा रोग से ग्रस्त पीड़ितों के बच्चे, बेघर बच्चों, कानून से संघर्षरत बच्चों, बाल तस्करी, बाल विवाह, बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति से मुक्त कराए बच्चों, प्राकृतिक आपदा के शिकार बच्चों को योजना का लाभ मिलता है।
दिव्यांग, लापता या घर से भागे बच्चों, जेल में बंद पिता या माता के बच्चों, एचआइवी-एड्स से प्रभावित बच्चों, आर्थिक, शारीरिक या मानसिक रूप से देखभाल करने में असमर्थ माता-पिता के बच्चो, फुटपाथ पर जीवन बिताने वाले बच्चों, प्रताड़ित या उत्पीड़ित बच्चों को स्पान्सरशिप योजना से मदद मिलेगी। शहरी क्षेत्रों में अधिकतम वार्षिक आय 96,000 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 72,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। अनाथ बच्चों के लिए आय सीमा नियम लागू नहीं होगा।
आवेदन के लिए आवश्यक अभिलेख
- बच्चे और अभिभावक का आधार कार्ड
- अभिभावक का आय प्रमाण पत्र
- बैंक पासबुक विवरण
- पासपोर्ट साइज फोटो
- स्कूल का पंजीकरण
- बच्चे की आयु/जन्म प्रमाण पत्र
- लागू होने पर मां-पिता मृत्यु प्रमाण पत्र
यहां करें आवेदन
विकास भवन स्थिति जिला प्रोबेशन कार्यालय या जिला बाल संरक्षण इकाई से संपर्क कर इसका आवेदन फार्म प्राप्त कर सकते हैं। फार्म भरकर सभी जरूरी अभिलेख के साथ जमा करना होगा है। डीएम की अध्यक्षता वाली समिति आवेदनों की जांच कर मंजूरी देती है।
जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में जीवन जीने वाले बच्चों के लिए स्पान्सरशिप योजना चल रही है। इस योजना से जिले में काफी बच्चों का आर्थिक मदद मिल रही है। डीएम अस्मिता लाल खुद बच्चों को मिलने वाली आर्थिक मदद की जानकारी लेती रहतीं हैं। डीएम के प्रयास से काफी बच्चों को योजना का लाभ मिल रहा है।
-राहुल वर्मा, जिला प्रोबेशन अधिकारी
