बागपत, जेएनएन। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ और बेगम समरू के गांव कोताना के विकास के लिए सरकार ने खजाने का मुंह खोल रखा है, लेकिन शायद जिम्मेदारों ने गंभीरता नहीं दिखाई तभी तो पांच साल में भी गांव की तस्वीर बदल नहीं पाई है। यमुना नदी किनारे बसे इस गांव में जो समस्याएं पहले थी वो ही परेशानियां आज भी हैं हालांकि गांव के अंदर कुछ विकास के काम होते तो नजर आते हैं, लेकिन जिस तरह हर वित्तीय वर्ष में लाखों रुपये गांव के खाते में आते रहे हैं, उन्हें देखकर लगता है कि शायद ही पूरा पैसा गांव के विकास पर खर्च किया गया हो। एक मोटे अनुमान के अनुसार वर्ष 2017-2018 से वित्तीय वर्ष 2021-2022, अभी तक लगभग 7.88 करोड़ गांव के विकास को मिले हैं, जिनमें से लगभग 5.59 करोड़ रुपए व्यय किए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बजट का आधा रुपया भी गांव में खर्च हो जाता तो शायद गांव की तस्वीर बदल जाती। हाल ही डीपीआरओ का कार्यभार संभालने वाले अमित कुमार का कहना है कि गांव में विकास कार्यों को देखेंगे कि किस मद में कितना व्यय हुआ है और धरातल पर काम हुआ भी है या नहीं। पूर्व प्रधान रईश का कहना है कि पांच साल में गांव में विकास के खूब काम कराए गए हैं हालांकि अभी भी कई काम होने बाकी है। ग्राम प्रधान मुकीद का कहना है कि गांव के विकास कार्य पर कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी। हर साल आ रहे विकास को लाखों रुपये

वर्ष 2017-2018 में लगभग 1.80 करोड़ रुपए मिले, जिनमें से 93.47 लाख रुपए खर्च हुए।

वर्ष 2018-2019 में लगभग 2.66 करोड़ रुपए मिले, जिनमें से 2.66 करोड़ रुपए खर्च हुए।

वर्ष 2019-2020 में लगभग 1.25 करोड़ रुपए मिले, जिनमें से 70.65 लाख रुपए खर्च हुए।

वर्ष 2020-2021 में लगभग 1.46 करोड़ रुपए मिले, जिनमें से 1.04 करोड़ रुपए खर्च हुए।

वर्ष 2021-2022 में लगभग 71.54 लाख रुपए मिले, जिनमें से 26.86 लाख रुपये खर्च हुए, अभी तक।

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