बागपत, जेएनएन। लहचौड़ा गांव के बुखार से ग्रस्त युवक ने इलाज के दौरान दिल्ली के अस्पताल में दम तोड़ दिया। युवक की मौत से स्वजन का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने गांव के अन्य ग्रस्तों की जांच के लिए शिविर लगाने की मांग की है।

क्षेत्र में बुखार का प्रकोप लगातार फैल रहा है। लगभग सभी गांव में वायरल बुखार, डेंगू और मलेरिया के मरीज मिल रहे हैं। प्राइवेट डाक्टरों के यहां मरीजों की इलाज को तार लगी रहती है। स्वास्थ्य विभाग भी बुखार पर कंट्रोल करने को भागदौड़ कर रहा है, लेकिन बुखार का प्रकोप कम होता नजर नहीं आ रहा है। लहचौड़ा गांव में निवासी 35 वर्षीय अरुण पुत्र रामटेक की कई दिन से बुखार आ रहा था। पहले तो स्वजन गांव के ही प्राइवेट डाक्टर से इलाज करा रहे थे, लेकिन हालत बिगड़ने पर दो दिन पूर्व दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया था। बुधवार को इलाज के दौरान अरुण ने दम तोड़ दिया। युवक की मौत से स्वजन में कोहराम मचा है। वहीं ग्रामीणों में दहशत फैली जा रही है, क्योंकि क्षेत्र में बुखार से मरने वालों का आंकड़ा चार पर पहुंच चुका है। लहचौड़ा में ही बड़ी संख्या में लोग बुखार की गिरफ्त में हैं। ग्रामीणों ने अधिकारियों से गांव में शिविर लगाए जाने की मांग की है। धनौरा सिल्वरनगर में बुखार से युवक की मौत

धनौरा सिल्वरनगर में बुखार का प्रकोप रुक नहीं रहा है। बुखार से पीड़ित युवक की हालत बिगड़ने से मौत हो गई। वहीं दर्जनों ग्रामीण बुखार की चपेट में हैं।

धनौरा सिल्वरनगर के सोनू कश्यप (28) को कई दिन से बुखार था। मंगलवार को हालत बिगड़ने पर स्वजन बड़ौत ले गए, जहां उसकी मौत हो गई। गांव में उमेश, सतीश, कुलदीप, आकाश, सीमा, प्रमोद, अजय आदि सहित दर्जनों बुखार की चपेट में हैं। गांव में पीएचसी पर लैब होने के बाद भी ग्रामीण एक निजी अस्वीकृत लैब पर मनमाने शुल्क पर टेस्ट कराने व झोलाछाप चिकित्सकों पर इलाज कराने को मजबूर है। विनोद प्रमुख, वीर सिंह प्रधान, बच्चू सिंह राणा, सतबीर राठी, दिलशाद, मोनू राणा, प्रांजुल शर्मा आदि ने स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों से पीएचसी पर पर्याप्त सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की है।

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