बागपत, जेएनएन। सूबे की सरकार भले ही करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन गो आश्रय स्थलों में बेसहारा गोवंश रामभरोसे हैं। इसकी बानगी रविवार को सीडीओ हुब लाल को निरीक्षण में देखने को मिली।

चंद माह पूर्व 1.20 करोड़ रुपये की लागत से बने सरूरपुरकलां गांव स्थित गो संरक्षण केंद्र में करीब 500 गोवंश पर एक केयर टेकर मिला। बाकी दो केयर टेकर नदारद मिले। हरा चारा नहीं मिलने पर केयर टेकर ने जवाब दिया कि जिससे चारा ढोया जाता है, उस ट्रैक्टर-ट्राली में पंचर हो गया है। कुछ देर में पंचर लगने के बाद हरा चारा लाया जाएगा। टूटी खोर की मरम्मत नहीं करवाने पर ग्राम पंचायत सचिव को प्रतिकूल प्रविष्टि देने का आदेश दिया।

वहीं सीडीओ को नैथला गांव के गो आश्रय स्थल पर 78 पशु मिले, लेकिन न सूखा भूसा मिला और न हरा चारा दिखाई दिया। खल और चोकर भी नहीं मिला। यहां भी दो केयर टेकर नहीं मिले। मौके पर मिले एक केयर टेकर ने जवाब दिया कि गोवंश को खिलाने के लिए भूसा गांव में एक मकान में रखा है। दिलचस्प यह है कि दोनों ही गो आश्रय स्थल पर जो केयर टेकर मिले, उन्होंने अपने नदारद साथी केयर टेकरों के बारे में एक जैसा जवाब दिया कि वे खाना खाने गए हैं। सीडीओ हुब लाल ने कहा कि इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।

यह हाल तब है, जब चंद रोज पहले ही बागपत में गोवंश की मौत का मामला लखनऊ तक गूंजने पर अधिकारियों

में खलबली मच गई थी।

Posted By: Jagran

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