बागपत, जेएनएन। छह माह से तीन कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर चल रहा किसान आंदोलन जोर पकड़ने लगा। पिछले कुछ दिनों से बागपत के किसानों का गाजीपुर बार्डर पहुंचने का सिलसिला बढ़ गया। अब 26 जून को बागपत से काफी किसानों की गाजीपुर बार्डर जाने की तैयारी में है।

अप्रैल में पंचायत चुनाव तथा मई में कोरोना के कहर बरपाने के कारण बागपत के किसानों को गाजीपुर व सिधु बार्डर पर जाना कुछ कम हो गया था। अब कोरोना का कहर कम होने व विधानसभा चुनावी साल होने के कारण किसान नेताओं ने सरकार पर दबाव बनाने की नीति बनाई है। किसान नेताओं का मानना है कि आंदोलन के शुरूआती दिनों जैसी भीड़ जुट जाए, तो फिर केंद्र सरकार यूपी समेत छह राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए दबाव में आकर तीनों कृषि कानून रद कर देगी और न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा दे सकती है। यही कारण है कि किसानों में आंदोलन को लेकर अब हलचल होने लगी है। पिछले कुछ दिनों से बागपत से रोजाना किसान गाजीपुर तथा सिधु बार्डर जाकर आंदोलन में शामिल हो रहे है। भाकियू जिलाध्यक्ष चौ. प्रताप गुर्जर ने कहा कि आने वाले दिनों में बागपत से गाजीपुर बार्डर जाने वाले किसानों की संख्या बढ़ेगी। 26 जून को बागपत से सैकड़ों किसानों गाजीपुर बार्डर जाकर आंदोलन में भाग लेंगे। ग्यारह जुलाई को ट्रैक्टर रैली में बागपत के सैकड़ों किसान शामिल होंगे। तीनों कृषि कानूनों को रद कराने के बाद ही दम लेंगे।

हबीबपुर नंगला में लाखों रुपये का गोलमाल

जागरण संवाददाता, बागपत: हबीपुर नंगला गांव के प्रधान जहान सिंह ने डीएम को दिए शिकायती पत्र में अपनी ग्राम पंचायत में लाखों रुपये के गोलमाल होने का आरोप लगाया है। कहा कि पंचायत सचिव ने हैंडपंप मरम्मत, पंचायत घर का सुंदरीकरण, गांव में सीसी रोड का निर्माण, गांव में वाल पेंटिग निर्माण, नाला निर्माण, हैंडपंप रिबोर आदि कार्यों पर ग्राम पंचायत के खातों से 7.16 लाख रुपये निकाले गए, जबकि ये काम गांव में कराए ही नहीं गए। प्रधान और ग्रामीणों ने डीएम से जांच कराकर कार्रवाई कराने की मांग की है। शिकायत पत्र पर राजवीर, गजराज

व मांगेराम, रण सिंह, सत्यवीर, जयप्रकाश समेत अनेक ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं। प्रधान ने बताया कि अधिकारियों ने जांच कराने का आश्वासन दिया है।