बागपत, जेएनएन। शुक्रवार को बुराइयों के प्रतीक रावण का दहन होगा। हर तरफ अब दशानन का दहन करने के लिए पुतले तैयार हैं। हर किसी को उस घड़ी का बेसब्री से इंतजार है, जब दशानन के पुतले आग लगाते ही धू-धूकर जल उठेंगे। तो आइए दस बुराइयों का दहन कर सही मायनों में विजयादशमी को सार्थक करें.।

कोरोना हराने को शारीरिक दूरी, मास्क, सैनिटाइजेशन, वैक्सीनेशन, भीड़ बचाव यानी कोविड प्रोटोकाल का पालन करने का संकल्प लेकर अमल करें। बदहाल तालाब बड़ी समस्या हैं। उन एक हजार तालाबों को कब्जा मुक्त कराना होगा, जिन्हें काफी पहले पाट दिया गया। बागपत शहर में बस अड्डा नहीं बना और जिले में विभिन्न मार्गों पर बसों का टोटा है।

इसमें कोई शक नहीं कि मोदी और योगी के शासन राज में सड़कों का निर्माण हुआ। इसके बावजूद जिले में 350 किमी सड़कें टूटी हैं। नगर निकायों में 90 नालों में अधिकांश के अटे होने से लोग जलभराव और बीमारियों की मार सहने को मजबूर हैं। वायु और जल प्रदूषण भी बागपत की बड़ी समस्या है। एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 के पार है, जो सामान्य से दोगुना है। हिडन व यमुना मैली हो गई व पानी जहर बन गया। प्रदूषण छुटकारा पाने को हम मिलकर थोड़ा प्रयास करें तो परिणाम सकारात्मक मिलेगा।

स्वच्छता को लेकर हमें गंभीर होना पड़ेगा। सफाई के साथ गांवों में सामुदायिक शौचालयों का बेहतर ढंग से संचालन करना होगा। पांच हजार बेसहारा गोवंशी पशुओं की ओर ध्यान देकर ठिकाना तथा चारा-पानी देने का काम करना होगा।

विजयादशमी के पर्व पर हम भ्रष्टाचार में कमी लाने का संकल्प लें कि रिश्वत देंगे और न लेंगे। आए दिन लूट-डकैती तथा हत्या जैसे अपराध से बागपत थर्राता रहता है। आइए अपराधों में कमी लाने को हम अब बच्चों को अच्छे संस्कार और समाज को अच्छा माहौल बनाने का संकल्प लेकर अमल कर विजयादशमी को सार्थक करें।

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जानिए समस्याएं..

-कोराना, तालाबों की बदहाली, बस अड्डा नहीं होना, टूटी सड़के, अटे नाले, प्रदूषण, गंदगी, बेसहारा पशु,

भ्रष्टाचार और अपराध की बुराइयों का दहन करना होगा।

Edited By: Jagran