बागपत, जेएनएन। इसमें कोई शक नहीं कि योगी राज में बागपत को भरपूर बिजली मिल रही है, लेकिन रोज आठ ट्रांसफर फुंकने से ऊर्जा निगम को लाखों रुपये की चपत लग रही है। ट्रांसफार्मर जलने से सालाना पंद्रह करोड़ रुपये की चपत लगने का औसत है।

ऊर्जा निगम ने चार साल का लेखा-जोखा तैयार किया है। चार साल में जिले में 12252 ट्रांसफार्मर फुंके हैं। यानी हर साल तीन हजार और रोजाना आठ ट्रांसफार्मर फुंकने का औसत है। यदि एक ट्रांसफार्मर के फुंकने से 50 हजार रुपये का नुकसान माना जाए तो चार साल में ऊर्जा निगम को 61 करोड़ रुपये की चपत लगी है।

यदि अपवाद छोड़ दें, तो शहरों में 24 घंटे तथा गांवों में 48 घंटे में खराब ट्रांसफार्मर बदले जाने से बिजली आपूर्ति ज्यादा समय बाधित नहीं होने से उपभोक्ताओं को ज्यादा परेशान नहीं उठानी पडी। अच्छी बात यह रही कि ट्रांसफार्मरों को कार्यशाला तक लाने-ले जाने का खर्च सरकार ने वहन किया। पहले इस खर्च को उपभोक्ता वहन करते थे।

हालांकि ऊर्जा निगम के ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि कराने से ट्रांसफार्मरों के खराब होने में काफी कमी आ सकती है। लाइन लास कम होगा और उपभोक्ताओं को ओर बेहतर बिजली मिलेगी। राजस्व भी बढ़ेगा और मरम्मत खर्च भी घटेगा।

---------------------

चार साल में फुंके टांसफार्मर क्षेत्र ट्रांसफार्मर

बड़ौत 8663

बागपत 3266

छपरौली 6131

--------------------

वर्जन:

-चार साल में 12 हजार ट्रांसफार्मर फुंके हैं, लेकिन तय समय में बदले भी गए हैं। ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की जगह ज्यादा क्षमता के ट्रांसफार्मर लगवाने का प्लान बन चुका है।

-अमर सिंह, एक्सईएन ऊर्जा निगम

Edited By: Jagran