बागपत, जेएनएन। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोवंश को लेकर गंभीर हैं। मुख्यमंत्री अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी कर रहे हैं, लेकिन जिले के अधिकारी सुधरने को तैयार नहीं हैं। जिले में ही गोवंश का बुरा हाल है। गो आश्रय स्थलों में गोवंश की हालत काफी नाजुक है। उन्हें ना चारा मिला रहा है और न बीमार गोवंश का इलाज हो रहा है। प्रति गोवंश हर रोज चारे के 30 रुपए आते हैं, लेकिन गोवंश को हर वक्त भूखे देखा जा सकता है। गांव में खुले आश्रय स्थलों पर चारे की जिम्मेदारी प्रधान और पंचायत सचिव और शहर व कस्बों में नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी की है। सवाल यह है कि गोवंश के चारे के लिए आने वाले पैसे को कौन खा रहा है, जो गोवंश को भरपेट चारा भी नहीं मिल रहा है।

बड़ौत शहर, बिनौली गांव, टीकरी और दोघट कस्बा, मुकंदपुर गांव, बदरखा गांव, बावली गांव, छपरौली कस्बे गोवंश स्थल खुले हुए हैं, जिनमें कई सौ की संख्या में गोवंश को रखा गया है। सरकार प्रति गोवंश चारा के 30 रुपए प्रत्येक दिन दे रही है। हालांकि 30 रुपए के चारे में एक दिन में एक पशु का पेट नहीं भरा जा सकता है, लेकिन जितने रुपये प्रतिदिन के हिसाब से सरकार संबंधित विभाग के अधिकारियों को दे रही है उन सारे रुपयों का चारा भी गोवंश आश्रय स्थल तक नहीं पहुंच रहा है। गोवंश की खोर खाली देखी जा सकती है। हरे चारे के नाम पर गोवंश को भूस दिया जा रहा है और वह भी भरपेट नहीं। यदि कोई गोवंश आश्रय स्थल पर चला जाता है तो गोवंश उस व्यक्ति की ओर चारे का इंतजाम होने की आस में दौड़ पड़ते हैं। खोर में भूसा डालते ही गोवंश उसे खा जाते हैं। उसके बाद भी भूखे रह जाते हैं यही कारण है कि खोर अधिकांश समय खाली ही मिलती है। सवाल यह है कि गोवंश को मिलने वाले सारे रुपयों का चारा खोर तक नहीं पहुंच पाता है।

एसडीएम गुलशन कुमार ने बताया कि जांच कराई जाएगी कि किस-किस स्थान पर गोवंश आश्रय स्थलों में गोवंश को भरपेट चारा नहीं मिल रहा है।

Posted By: Jagran

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