मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना: गन्ना बेल्ट में नीली क्रांति... बागपत में दो हजार मीट्रिक टन हुआ मछली उत्पादन
Baghpat News: बागपत में एक साल में रिकॉर्ड दो हजार मीट्रिक टन मछली उत्पादन हुआ है, जिससे गन्ना बेल्ट में ...और पढ़ें

हरचंदपुर गांव के पास तालाब में पाली गई मछली दिखाते ग्रामीण व अन्य। सौ. विभाग
HighLights
तालाबों में पानी भरने को डीजल तक का खर्चा उठा रही सरकार।
मछली पालन से 600 से अधिक लोगों को मिला रोजगार।
जागरण संवाददाता, बागपत। गन्ना बेल्ट बागपत में नीली क्रांति की आहट सुनाई पड़ने लगी है, क्योंकि एक साल में रिकार्ड दो हजार मीट्रिक टन मछली उत्पादन हुआ। वहीं, मंगलवार को डीएम अस्मिता लाल की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना में छह लाभार्थियों का चयन किया, जिनका तालाबों में पानी भरने समेत तमाम खर्चों में 40 प्रतिशत सरकार वहन करेगी।
मत्स्य पालक विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संतोष कुमार वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना में प्रति हेक्टेयर मछली पालन पर चार लाख रुपये का खर्च आता है। इसमें 1.60 लाख रुपये अनुदान मिलता है। यह अनुदान मत्स्य, बीज, तालाबाें में पानी भरने को डीजल या बिजली खर्च, मछलियों के लिए चारा और दवाइयों के लिए मिलता है।
जिनके पास किसी ग्राम पंचायत या नगर निकाय के तालाब का 10 साल का पट्टा आवंटन हो, उसे ही इस योजना का लाभ मिलता है। मंगलवार को डीएम अस्मिता लाल की अध्यक्षता में छह लाभार्थियों का चयन किया गया। मछलियों की होम डिलीवरी के लिए तीन युवाओं का मोपेड विद आइस बाक्स के लिए चयन किया गया।
प्रत्येक को मोपेड खरीदने के लिए 24 हजार रुपये अनुदान मिलेगा। मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए भी मछली पालन कराने को ऑनलाइन आवेदन लिए गए। चयनित लाभार्थियों को 10 से 15 लाख रुपये तक अनुदान मिलेगा।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि यमुना में मत्स्य पालन कराने को 50 हजार मछलियों के बच्चे आवंटित हुए हैं, जिन्हें सितंबर या अक्टूबर में यमुना में छोड़ा जाएगा। एक साल में बागपत में तालाबों तथा यमुना में मिलाकर दो हजार मीट्रिक टन मछलियों का उत्पादन हुआ है। मछली पालन से प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से 600 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है। बता दें कि पांच साल पहले मुश्किल से 400 मीट्रिक टन भी मछलियों का उत्पादन होता था।
