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चिंताजनक: देश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर बड़ौत, मेरठ रहा दूसरे स्थान पर...सांस लेना भी मुश्किलभरा

By Zaheer Hasan Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Sun, 25 Oct 2026 12:58 PM (IST)

बागपत जिले में दीपावली से पहले वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। शनिवार को बड़ौत देश का सर्वाधिक ...और पढ़ें

(प्रतीकात्मक फोटो)

(प्रतीकात्मक फोटो)

जागरण संवाददाता, बागपत। दीपावली से पहले जिले में वायु प्रदूषण का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। शनिवार को बड़ौत शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 324 रहा, जो देश में सर्वाधिक था। बागपत शहर का एक्यूआइ भी 278 रहा। सामान्य से तीन गुणा ज्यादा प्रदूषित हवा ने कृषि प्रधान जिले के फेफड़ों को भींच कर रख दिया है। इसके बावजूद सरकारी तंत्र वायु प्रदूषण को लेकर कतई गंभीर नही, क्योंकि इसे रोकने के लिए कहीं कोई कार्य होता नजर नहीं आया।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शनिवार की शाम चार बजे देश के 268 प्रमुख शहरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक जारी किया। बड़ौत के बाद 321 एक्यूआइ के साथ दूसरा स्थान मेरठ और 309 एक्यूआइ के साथ तीसरा स्थान गजरौला का रहा। बड़ौत तथा बागपत में पीएम 2.5 व पीएम-10 का लेवल बढ़ने से लोगों की सांसें फूलने लगी हैं। जिला अस्पताल व सीएचसी और निजी अस्पतालों में शनिवार को अन्य दिनों के मुकाबले सांस, आंखों में जलन तथा त्वचा संबंधी मरीजों की संख्या में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। यह हाल तब है जब ग्रेप-1 लागू है।

पराली तथा फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए जिला, ब्लाक व ग्राम पंचायत स्तरों पर गठित कमेटियां कागजों पर सिमटी हैं। धूल रोकने के लिए पानी छिड़काव कराने का काम भी कहीं होता नहीं दिखा। जिले 50 से ज्यादा कोल्हुओं तथा 200 से ज्यादा फैक्ट्रियों में से कइयों की चिमनियां धुआं उगलती दिखीं। मिट्टी खनन व परिवहन, बिना ढके डस्ट ढुलाई जारी है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पर्यावरण अभियंता ने फोन काल रिसीव नहीं की।

इन रोगों का बढ़ जाता है खतरा
चिकित्सकों के मुताबिक वायु प्रदूषण से हार्टअटैक, ब्लड प्रेशर, पैरालाइसिस, ब्रेनहैमरेज तथा गला खराब होने का खतरा बढ़ गया है। सांस नली में सूजन से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। सीएचसी अधीक्षक डा. विभाष राजपूत ने लोगों को सलाह दी कि मास्क का उपयोग करें। बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीज सुबह सैर से बचें। घरों की खिड़की-दरवाजे बंद रखें।