यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 19, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बकाया नहीं चुकाने पर कर्ज देने से हाथ खींच रहे बैंक
उप्र अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के जिला प्रबंधक विमल कुमार ढाका ने कर्ज की रकम नहीं चुकाने पर कार्रवाई ...और पढ़ें

बागपत, जेएनएन। उप्र अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के जिला प्रबंधक विमल कुमार ढाका ने कर्ज की रकम नहीं चुकाने पर कार्रवाई शुरू की। 300 लोगों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी कि कर्ज नहीं चुकाने पर वसूली की कार्रवाई होगी। इन पर करीब एक करोड़ रुपये बकाया है।
स्पेशल कंपोनेंट स्कीम के तहत अनुसूचित जाति के लोगों को स्वरोजगार करने के लिए 20 हजार से लेकर दो लाख रुपये तक बैंकों से कर्ज दिया जाता है। इसमें प्रत्येक लाभार्थी को 10 हजार रुपये अनुदान दिया जाता है। कर्ज नहीं चुकाने के कारण बैंकों ने कर्ज देने से हाथ खींच रखा है।
वर्तमान वित्त वर्ष में स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत शासन से 360 लोगों को कर्ज देने का लक्ष्य दिया हुआ है, लेकिन बैंकों ने अभी तक महज 50 लोगों को कर्ज दिया। जिला प्रबंधक ने बैंक अधिकारियों से अनुरोध किया है कि नये लोगों को कर्ज देने का लक्ष्य पूरा किया जाए।
कृषि कानून वापसी किसानों के हित में अच्छा कदम
जागरण संवाददाता, बड़ौत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैसे ही कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की तो क्षेत्र के किसानों ने प्रधानमंत्री के फैसले का स्वागत कर उन्हें धन्यवाद दिया और फैसले को किसानों के हित में बताया। वहीं कुछ किसानों ने इसे चुनावी फंडा भी बताया है। किसानों से बात की गई तो उन्होंने मिली जुली प्रतिक्रिया दी।
सिनौली गांव के पुष्पेंद्र ने कहा कि कृषि कानून वापस लिए जा रहे हैं, इससे बहुत खुशी है। बिजली के बिल, एमएसपी, खाद और भी मुद्दे हैं। उनका भी समाधान होना चाहिए। मलकपुर चीनी मिल में बकाया गन्ना भुगतान बड़ा मुद्दा है। समाधान होना चाहिए। लोयन गांव के रामवीर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने किसानों के हित को देखते हुए कृषि कानूनों की वापसी का फैसला लिया है। प्रधानमंत्री जी ने किसानों की बात सुनी। दाहा गांव के रामकुमार राणा का कहना है कि यह कृषि कानून वापसी का अच्छा कदम है। देर आए दुरुस्त आए। एक बहुत अच्छा कदम उठाया प्रधानमंत्री ने। अब बात आगे की हो। कान्हड़ गांव के सुरेंद्र सिंह का कहना है कि यह किसानों की जीत है। आगे उम्मीद एमएसपी पर कानून बनाने की करते हैं। दाहा गांव का कालूराम का कहना है कि प्रधानमंत्री ने किसानों की समस्या को समझा है, इसलिए कानून वापसी का फैसला लिया है। प्रधानमंत्री एमएसपी पर और भी ध्यान दें।
