39 साल में बागपत से निकले सात अर्जुन अवार्डी खिलाड़ी, अब चमके निशानेबाज अखिल श्योराण
खेल सुविधाओं के अभाव के बावजूद बागपत ने 39 सालों में सात अर्जुन अवार्डी दिए हैं, जिसमें हाल ही में निशानेबाज अखिल श्योराण शामिल हैं।

अर्जुन अवार्डी शौकेंद्र तोमर, राजीव तोमर, सुभाष तोमर, सुनील राणा, विवेक सिंह और अंकुर धाम क्रमश:।
HighLights
बागपत ने 39 सालों में 7 अर्जुन अवार्डी दिए।
निशानेबाज अखिल श्योराण नवीनतम अर्जुन अवार्डी हैं।
कुश्ती, निशानेबाजी, एथलेटिक्स में खिलाड़ियों ने नाम रोशन किया।
राजीव पंडित, बागपत। खेल सुविधाओं के घोर अभाव के बावजूद बागपत के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। जिले के खिलाड़ियों की उपलब्धियों में अब एक और बड़ा अध्याय जुड़ गया है।
अंगदपुर गांव के निशानेबाज अखिल श्योराण को अर्जुन अवार्ड मिलने के साथ ही बागपत के खिलाड़ियों को मिलने वाले अर्जुन अवार्ड की संख्या सात पहुंच गई है। खास बात यह है कि इन खिलाड़ियों ने कुश्ती, निशानेबाजी और एथलेटिक्स जैसे अलग-अलग खेलों में देश का नाम रोशन किया है।
बागपत के अर्जुन अवार्ड की शुरुआत वर्ष 1987 में हुई थी। मलकपुर गांव के रहने वाले एशिया चैंपियन सुभाष पहलवान को तत्कालीन मेरठ जनपद, वर्तमान बागपत, में सबसे पहले अर्जुन अवार्ड मिला था।
इसके बाद मलकपुर के ही पहलवान राजीव तोमर और शौकेंद्र तोमर ने अपनी उपलब्धियों से जिले का गौरव बढ़ाते हुए अर्जुन अवार्ड हासिल किया। एक ही गांव के तीन पहलवानों को कुश्ती में यह प्रतिष्ठित सम्मान मिलना मलकपुर की खेल प्रतिभा का बड़ा प्रमाण है।
इसके बाद, दाहा गांव के पहलवान सुनील राणा ने अर्जुन अवार्ड हासिल किया। इस तरह कुश्ती में बागपत के चार खिलाड़ियों को अर्जुन अवार्ड मिल चुका है। वहीं निशानेबाजी में जौहड़ी गांव के विवेक सिंह ने यह सम्मान हासिल किया।
अब अंगदपुर के निशानेबाज अखिल श्योराण को अर्जुन अवार्ड मिलने से निशानेबाजी में भी जिले की उपलब्धियों का सिलसिला आगे बढ़ा है। जौहड़ी और अंगदपुर गांव सटे हुए हैं। खेकड़ा के दिव्यांग एथलीट अंकुर धामा ने भी अपनी असाधारण प्रतिभा के दम पर अर्जुन अवार्ड हासिल किया। उन्होंने साबित किया कि शारीरिक चुनौतियां प्रतिभा और हौसले के सामने बाधा नहीं बन सकतीं।
सुविधाएं कम, उपलब्धियां बड़ी
बागपत में खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं अपेक्षाकृत कम मिलती हैं। इसके बावजूद यहां की मिट्टी से निकले खिलाड़ियों ने देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है। गांवों के अखाड़ों से लेकर निशानेबाजी और एथलेटिक्स तक खिलाड़ियों ने मेहनत और लगन के दम पर उपलब्धियां हासिल की हैं।
1987 से अब तक जारी है सिलसिला
वर्ष 1987 में सुभाष पहलवान से शुरू हुआ अर्जुन अवार्ड का सफर अब अखिल श्योराण तक पहुंच गया है। लगभग चार दशक में सात खिलाड़ियों को यह प्रतिष्ठित सम्मान मिलना बागपत के लिए बड़ी उपलब्धि है।
कुश्ती में चार, निशानेबाजी में दो और एथलेटिक्स में एक खिलाड़ी अर्जुन अवार्ड हासिल कर चुका है। खिलाड़ियों की यह उपलब्धि जिले में खेल प्रतिभाओं की मजबूत मौजूदगी का प्रमाण है।
चार पहलवानों की प्रतिक्रिया
बागपत की मिट्टी में शुरू से ही कुश्ती की मजबूत परंपरा रही है। खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिलें तो यहां से और भी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकल सकते हैं। लोग अपने बच्चों को खेलों से जोड़ें।
-सुभाष पहलवान, अर्जुन अवार्डी
गांवों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल उन्हें सही प्रशिक्षण, खेल मैदान और संसाधन उपलब्ध कराने की है। निशानेबाज अखिल श्योराण की उपलब्धि जिले के युवाओं को प्रेरित करेगी।
-राजीव तोमर, अर्जुन अवार्डी
एक ही गांव के तीन पहलवानों को अर्जुन अवार्ड मिलना मलकपुर के लिए गर्व की बात है। नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को लगातार मेहनत और अनुशासन के साथ आगे बढ़ना चाहिए, तभी सफलता मिलेगी।
-शौकेंद्र तोमर, अर्जुन अवार्डी
बागपत के खिलाड़ियों ने हमेशा सीमित संसाधनों में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। अखिल श्योराण को अर्जुन अवार्ड मिलना इस बात का प्रमाण है कि जिले की खेल प्रतिभाओं का सफर लगातार आगे बढ़ रहा है।
-सुनील राणा, अर्जुन अवार्डी
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