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फेरे लिए सुनीता ने और कन्यादान मिला मुन्नी को, प्रशासनिक अधिकारी भी सकते में... एडीओ से मांगा स्पष्टीकरण

By Zaheer Hasan Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Mon, 14 Sep 2026 05:50 AM (IST)

बागपत में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सुनीता के विवाह में कन्यादान की राशि गलती से उनकी माँ मुन्नी ...और पढ़ें

(प्रतीकात्मक फोटो)

(प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. सुनीता के विवाह में कन्यादान की राशि माँ मुन्नी के खाते में भेज दी गई।

  2. मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में यह गंभीर अनियमितता सामने आई।

  3. समाज कल्याण निदेशक ने अधिकारी और एडीओ से स्पष्टीकरण मांगा।

जागरण संवाददाता, बागपत। फेरे सुनीता ने लिए और कन्यादान मुन्नी को मिल गया। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में यह गजब मामला पकड़ में आने पर लखनऊ तक अफसर चौंक गए। अब निदेशक ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को नोटिस जारी कर रिपोर्ट तलब की कि ऐसे और कितने मामले हैं। जांच में सामने आया कि सुनीता के बजाय उनकी मां मुन्नी का एकाउंट नंबर दर्ज कर दिया, जिसमें शगुन की 64 हजार की राशि उसमें गई जो गलत है। एडीओ से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।

समाज कल्याण निदेशक संजीव सिंह ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर कहा कि चालू वित्त वर्ष में हुई शादी में सुनीता के आवेदन पत्र में मुन्नी देवी का बैंक एकाउंट नंबर पोर्टल पर अपलोड किया गया। इससे कन्या के जीवन में खुशहाली एवं गृहस्थी की स्थापना के लिए 64 हजार रुपये सुनीता के बजाय मुन्नी देवी के खाते में ट्रांसफर किए गए। नियम यह है कि जिसकी शादी हुई है, उसके एकाउंट में सहायता राशि भेजी जाएगी। आवेदिका की पहले शादी तो नहीं हुई, वह 18 साल से कम आयु तो नहीं और बैंक एकाउंट उसका है या नहीं इसका सत्यापन अनिवार्य होता है।

एडीओ मोहित मलिक ने सुनीता के आवेदन का सत्यापन किया था मगर उन्होंने सुनिश्चित नहीं किया कि बैंक एकाउंट आवेदिका है या नहीं। जिला समाज कल्याण अधिकारी तथा एडीओ से स्पष्टीकरण तलब किया। जिला समाज कल्याण अधिकारी नीलम सिंह चौहान ने कहा कि जांच कराई गई जिसमें सुनीता के आवेदन के साथ उनकी मां मुन्नी देवी की बैंक एकाउंट की पासबुक और नंबर पोर्टल पर अपलोड हुआ। ऐसा कोई और मामला नहीं है।

90 विवाहित जोड़ों ने खुद को बताया था कुंवारा
गत जुलाई में 90 जोड़े अपात्र मिले थे क्योंकि इनकी शादी पहले हो गई थी। अनुदान हड़पने के लिए आवेदन किए थे। अधिकारियों ने इन आवेदनों को निरस्त कर लाखों की चपत लगने से बचाई थी।