116 कब्रों वाले सिनौली की कहानी अभी तक अधूरी... बागपत के बाशिंदों की मांग-फिर से हो उत्खनन
बागपत के सिनौली गांव के लोग एएसआइ से 2018-19 से बंद पड़ी खोदाई को दोबारा शुरू करने की मांग कर ...और पढ़ें

सिनौली साइट पर उत्खनन के दौरान निकला रथ। जागरण आर्काइव
HighLights
एएसआइ ने 28.50 हेक्टेयर कृषि भूमि का किया है अधिग्रहण
ग्रामीणों की मांग है कि व्यापक स्तर पर उत्खनन किया जाए।
116 कब्रों वाले पुरास्थल की अधूरी कहानी पूरी हो सके।
जागरण संवाददाता, बड़ौत (बागपत)। महाभारतकाल से जुड़े सिनौली गांव में एक बार फिर गांव के लोगों ने एएसआइ से मांग की है कि वर्ष 2018-19 से बंद खोदाई को दोबारा और व्यापक स्तर पर शुरू कराया जाए, ताकि सिनौली की अधूरी कहानी पूरी हो सके। इसके साथ ही गांव के विकास के रास्ते खुल सकें।
सिनौली की धरती से सामने आया प्राचीन इतिहास अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के सरकारी अभिलेखों के अनुसार 2004-05 और 2005-06 में हुई खोदाई में यहां लगभग 116 दफन स्थल मिले थे। कुछ दफन स्थलों में पशु बलि के संकेत और तांबे की एंटीना तलवारें भी मिली थीं। इसके बाद 2017-18 और 2018-19 में पहले उत्खनन क्षेत्र से लगभग 120 मीटर दूर फिर खोदाई की गई।
इसमें पांच ताबूत आदि के अलावा रथ, तांबे की तलवारें, खंजर, ढाल, दर्पण, कंघी, मनके और सोने व अर्धकीमती पत्थरों के आभूषण भी मिले। एएसआइ ने इस स्थल को कालखंड 2000 से 1800 ईसा पूर्व बताया है। गांव के लोगों का कहना है कि 116 दफन स्थलों वाला पुरास्थल खुद में बड़ा प्रमाण है, इसलिए एएसआइ को व्यापक और आधुनिक तकनीक से दोबारा सर्वे कराकर जरूरत के अनुसार उत्खनन शुरू करना चाहिए।
जिन स्थानों पर अभी तक खोदाई नहीं हुई है, वहां जमीन के नीचे प्राचीन सभ्यता से जुड़े कई और प्रमाण दबे हो सकते हैं। ताकि सिनौली की अधूरी कहानी पूरी हो सके। एसडीएम बाल कृष्ण सिंह का कहना है कि इस संबंध में एएसआइ के अधिकारियों से संपर्क कर अभी तक हुई कार्रवाई को अपडेट किया जाएगा और आगे क्या कुछ हो सकता है इस पर विचार किया जाएगा।
दोबारा सर्वे कर उत्खनन कराना चाहिए
सिनौली में अब तक हुई खोदाई ने प्राचीन इतिहास की कई महत्वपूर्ण परतें खोली हैं। 116 दफन स्थलों के अलावा यहां रथ और हथियार जैसी दुर्लभ वस्तुएं मिली हैं। इसके बावजूद पुरास्थल का बड़ा हिस्सा अभी भी जमीन के नीचे है। एएसआइ को आधुनिक तकनीक से दोबारा सर्वे कर उत्खनन कराना चाहिए।
-प्रभाष शर्मा, ग्रामीण
इतिहास की कई कड़ियां अभी जुड़ना बाकी है
सिनौली की पहचान देश ही नहीं, दुनिया के महत्वपूर्ण पुरास्थलों में हो सकती है। यहां मिले ताबूत, रथ और आभूषण प्राचीन सभ्यता की समृद्धि बताते हैं। चार हजार वर्ष पुराने इतिहास की कई कड़ियां अभी जुड़ना बाकी हैं। सरकार को संरक्षण के साथ नए सिरे से शोध और उत्खनन पर जोर देना चाहिए।
-सतेंद्र मान, ग्रामीण
