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गजब! बजट में मिले 5 रुपये खर्च न करने पर ग्राम सचिव की उड़ी नींद, अफसरों ने नोटिस जारी कर मांगा 'हिसाब-किताब'

By Zaheer Hasan Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Mon, 21 Sep 2026 06:50 AM (IST)

Baghpat News: बागपत में एक ग्राम सचिव को गांव की सफाई के लिए मिले मात्र पांच रुपये का बजट खर्च ...और पढ़ें

AI जेनरेटिड फोटो

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HighLights

  1. बागपत में ककड़ीपुर ग्राम सचिव को 5 रुपये खर्च न करने पर नोटिस।

  2. अन्य ग्राम सचिवों को भी छोटी राशि खर्च न करने पर नोटिस।

जागरण संवाददाता, बागपत। चौकिए मत! गांव की सफाई पर केवल पांच रुपये का बजट खर्च नहीं करने से ककड़ीपुर के ग्राम सचिव की मुश्किल बढ़ गई। अधिकारियों के नोटिस जारी कर तत्काल बजट खर्च कर उपभोग प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

इससे ग्राम सचिव की रातों की नींद उड़ गई, क्योंकि पांच रुपये में एक झाडू भी नहीं आएगी। इनके अलावा 18 रुपये तथा 98 रुपये का बजट खर्च नहीं करने वाले ग्राम सचिवों को भी नोटिस दिया गया।

स्वच्छ भारत मिशन के फेज-2 में 167 ग्राम पंचायतों को चालू वित्त वर्ष मिला 3.30 करोड़ का बजट बैंक खातों पड़ा है। एक सप्ताह पहले सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने समीक्षा कर बजट खर्च नहीं होने पर नाराजगी जताई थी।

हिसावदा में 18 और ढिकाना में 98 रुपये का बजट खर्च होना बाकी

तब डीपीआरओ रमेश चंद्र गुप्ता ने 16 सितंबर को ग्राम सचिवों को नोटिस देकर बजट खर्च नहीं होने पर जिले की रैंक प्रभावित होने का हवाला देकर तत्काल बजट खर्च कर उपभोग प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के लिए निर्देश दिया। नोटिस के साथ भेजी सूची में ग्राम पंचायत ककड़ीपुर में पांच रुपये, ग्राम पंचायत हिसावदा में 18 रुपये और ग्राम पंचायत ढिकाना में 98 रुपये का बजट खर्च होना बाकी है।

बजट खर्च नहीं करना ग्राम सचिव की लापरवाही 

डीपीआरओ के निर्देश के बाद एडीओ सुधीर कुमार ने भी अन्य गांवों के साथ ककड़ीपुर के ग्राम सचिव को नोटिस देकर तत्काल बजट खर्च नहीं करने की हिदायत दी। बजट खर्च नहीं करना ग्राम सचिव की लापरवाही दर्शाता है।

ग्राम पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन का अवशेष काम पूरा करने, बजट खर्च के बाद भुगतान के लिए आवश्यक अभिलेख, बिल-वाउचर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। ग्राम सचिव विक्रांत तोमर ने कहा कि बजट उनसे पहले ग्राम पंचायत को मिला था जो खर्च हो गया। काम पूरा होने पर पांच रुपये बचे थे। नोटिस जारी करना गलत है। डीपीआरओ का कहना है कि पांच रुपये बड़ी बात नहीं है, लेकिन ग्राम सचिव को खाता तो क्लियर करना ही होगा।