गूगल मैप का 'भ्रम' और सिस्टम की लापरवाही 13 मौतों के लिए जिम्मेदार! EPE पर नहीं हैं संकेतक, न मैप से हटे बंद कट
EPE Accident:पूर्वी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर बंद यू-टर्न पर संकेतक न होने और गूगल मैप पर गलत जानकारी के कारण भीषण ...और पढ़ें

बड़ागांव के पास अस्थाई डिवाइडर से बंद किया यूटर्न। दुर्घटनाग्रस्त वाहन में लोहे के जाल से बैठने को बनाई गई स्लैब (नीले घेरे में)। जागरण
HighLights
बड़ागांव टोल प्लाजा बनने के बाद एनएचएआइ ने बंद किए थे यू-टर्न।
गूगल मैप पर बागपत सीमा के सभी यूटर्न चालू होने की जानकारी।
संवाद सहयोगी, खेकड़ा (बागपत)। ईपीई (Eastern Peripheral Expressway) पर हुए भीषण हादसे में सरकारी सिस्टम की लापरवाही भी सामने आई है। एक्सप्रेसवे पर बने तीनों यू-टर्न को अस्थाई डिवाइडर रखकर बंद कर दिया गया है, लेकिन कोई संकेतक नहीं लगाए गए हैं। यही कारण है कि मोबाइल पर गूगल मैप के सहारे आ रहे श्रद्धालुओं को यह कट खुला दिख रहा था, उनके हल्का ब्रेक लेते ही पीछे आ रही कैंटर पिकअप से भिड़ गई।
इससे पहले भी यहां तीन दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे पर बागपत जिले की सीमा करीब 23 किमी लंबी है। बागपत कोतवाली के मवीकलां में यमुना नदी से चांदीनगर में हिंडन नदी तक बागपत की सीमा पड़ती है। सीमा में तीन यूटर्न हैं, लेकिन पिछले डेढ़ साल से तीन को एनएचएआइ ने सीमेंटिड डिवाइडर रखकर बंद करा रखा है।
रटौल के पास आपातकालीन बैरियर लगा है, लेकिन वह हमेशा बंद रहता है। अगर कोई गलती से गाजियाबाद से एक्सप्रेसवे पर एंट्री कर लेता है तो वापस लौटने के लिए बड़ागांव व मवीकलां टोल पर बूथ से बाहर निकलना पड़ता है। इसके अलावा हरियाणा के कुंडली टोल से यूटर्न लिया जा सकता है। करीब दो साल से तीन यू-टर्न के बंद होने से राहगीरों को परेशानी होती है।
सबसे ज्यादा परेशानी गैर प्रदेश व जिले के वाहन सवारों को होती है। गूगल मैप पर तीनों यूटर्न खुले दिखते हैं, परंतु मौके पर बंद होने के लिए कोई भी संकेतक आसपास नहीं है।
ऐसे में पहले भी तीन दुर्घटनाएं बड़ागांव व बसी रेलवे ओवरब्रिज के बीच बंद किए गए यू-टर्न पर हो चुकी हैं। गनीमत रही कि पूर्व की दुर्घटना में वाहन सवारों को मामूली चोटें आई थीं, लेकिन रविवार रात के भीषण हादसे में 13 लोगों की जान चली गई, जबकि 23 लोग घायल हैं। अगर एनएचएआइ की ओर से यू-टर्न को बंद करने के बाद अगर संकेतक लगाए जाते तो शायद 13 लोग बेमौत नहीं मारे जाते।
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टोल बनने के बाद बंद किए थे यू-टर्न
टोल चालू होने के बाद चालक वाहनों को दूसरी साइड में ले जाने के लिए बसी अंडरपास वाले यू-टर्न से वाहनों को मोड़ लेते थे। उस समय एक-दो दुर्घटनाएं हुई थीं। दुर्घटनाओं काे देखते हुए एनएचएआइ अधिकारियों ने यूटर्न बंद कराने के लिए यह कदम उठाया था। तभी से आपातकालीन समय में ही कर्मचारी अपनी जरूरत के हिसाब से यू-टर्न को खोल अथवा बंद करते रहते हैं।
मैप से हटवाने चाहिए बंद यू-टर्न
गूगल मैप पर हरेक रास्ते की जानकारी है, ऐसे में वर्षों पहले से चालू बागपत सीमा के सभी यूटर्न के चालू होने की जानकारी है। इस जानकारी के हिसाब से ही बड़ागांव व बसी रेलवे अंडरपास के बीच यूटर्न पर कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। जब अधिकारियों ने यू-टर्न बंद कराया और दुर्घटनाएं हुई हैं तो ऐसे में गूगल मैप पर अपलोड यू-टर्न के चालू होने के डाटा को हटवाया क्यों नहीं? इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
पहले भी भटका चुका है गूगल मैप
इससे पहले भी राहगीरों के गूगल मैप के जरिए गलत रास्ते पर जाने के मामले सामने आ चुके हैं। बड़ागांव टोल बूथ के निर्माण के दौरान भी कई ट्रक गाजियाबाद के दुहाई टोल पर उतरने के बजाए मैप के हिसाब से बड़ागांव में ही उतर गए। इतना ही नहीं मैप ने ट्रकों को खेतों से होकर बंद रास्तों पर ले जाकर फंसा दिया। एक ट्रक कच्चे रास्ते पर जाकर खेत में पलट भी गया था।
एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी घटना
27 मई 2018 में ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था। बागपत जिले में इन आठ साल में दुर्घटनाओं में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। शुरुआती वर्ष में सरफाबाद गांव के पास किनारे खड़े ट्रक से स्विफ्ट कार टकराई थी। दुर्घटना में नोएडा कालेज से एमबीबीएस के तीन छात्र व दो छात्राओं की मौत हुई थी। उसके बाद एक-एक, दो-दो राहगीरों की मौत हो चुकी है, लेकिन रविवार रात वाली बड़ी दुर्घटना है।
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हादसे ने सिस्टम की नाकामी की पोल खोली
राजस्थान से बागपत माल वाहन होने के बावजूद पिकअप गाड़ी भूसे की तरह श्रद्धालुओं को लेकर दौड़ता रही। अनेकों चेकपोस्ट और टोल प्लाजा से गुजरी होगी, लेकिन किसी ने चेक करने की जरूरत नहीं समझी। वाहन स्वामी अधिक रुपये कमाने के लिए नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं। अधिक यात्रियों को बैठाने के लिए लकड़ी के फट्टे लगाते हैं।
माल ढोने वाला छोटा हो या बड़ा वाहन, सभी में डबल स्टोरी बनाकर 10 के बजाय 60 लोगों के बैठने की व्यवस्था की जाती है। अधिकारी भी ऐसे वाहनों पर ध्यान नहीं देते हैं। इसकी बानगी रविवार रात एक्सप्रेस-वे पर हुए हादसे के क्षतिग्रस्त वाहन के साथ देखने को मिली। दुर्घटना में क्षतिग्रस्त पिकअप गाड़ी में बैठने की डबल स्टोरी बना रखी थी, जिसमें महिला बच्चे व पुरुष समेत 36 श्रद्धालु सवार थे।
