बागपत, जेएनएन। जिले की हवा सुधरने का नाम नहीं ले रही है। गुरुवार को हवा की सेहत और खराब हो गई। बुधवार को जहां एयर क्वालिटी इंडेक्स 411 था वहीं गुरुवार को यह

440 पर पहुंच गया। सुबह के समय बागपत में कोहरा सा छाया रहा। इससे लोगों का दम फूलने लगा। पिछला रिकार्ड तोड़ दिया। आंखों से असहनीय जलन होती रही। अस्थमा से पीड़ित बच्चों की तो जान पर बन आई।

जिला अस्पताल तथा प्राइवेट डाक्टरों के यहां मरीजों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। सांस के पुराने मरीज ज्यादा आ रहे हैं। इन्हेलर बिक्री लगातार बढ़ रही है। कई मरीजों की गले में सूजन आ चुकी है। वहीं सरकारी तंत्र सड़कों पर दौड़ते कंडम वाहनों से निकलता धुंआ, धूल के गुबार, मिट्टी एवं बालू खनन एवं परिवहन, निर्माण कार्यों से उड़ती धूल, डस्ट ढुलाई, कोल्हुओं पर जलती पत्ती तथा गन्ना खोई से उठ रहा धुआं तथा फैक्ट्रियों से फैल रहे प्रदूषण पर रोक लगाने का काम धड़ाम है।

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पड़ रही दोहरी मार

सर्दी और प्रदूषण की दोहरी मार से जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ गया। डा. मनीष त्यागी कहते हैं कि प्रदूषण फैलने वाले कण ऊपर सांस लेने के साथ शरीर में पहुंच रहे हैं जिससे हार्टअटैक, स्ट्रोक्स, ब्लड प्रेशर, पैरालाइसिस, ब्रेनहैमरेज तथा गला खराब होने का खतरा है। सीएचसी अधीक्षक डा. विभाष राजपूत ने कहा कि इस वातावरण में सांस नली में सूजन आने से फेफड़ों में हवा जाने में रुकावट से सांस में दिक्कत होती है। अस्थमा मरीज धूल-मिट्टी तथा पालतू जानवारों से दूर रहें तथा ध्रूम्रपान न करें।

Posted By: Jagran

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