उम्र को मात देकर बने सरकारी शिक्षक, 59 वर्ष की उम्र में बागपत के विजय कुमार को मिली सफलता
बड़ौत के बड़ावद गांव के विजय कुमार शर्मा ने 59 वर्ष की उम्र में टीजीटी संस्कृत शिक्षक बनकर उम्र को ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
विजय कुमार शर्मा 59 वर्ष की आयु में सरकारी शिक्षक बने।
उन्हें शामली जनपद में टीजीटी संस्कृत शिक्षक के रूप में नियुक्ति मिली।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में नियुक्ति पत्र वितरित किए।
संवाद सहयोगी, बड़ौत (बागपत)। उम्र भले ही जीवन के दिन और वर्षों को गिनती हो, लेकिन सपनों को पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती। इसे साबित किया है गांव बड़ावद के विजय कुमार शर्मा ने, जिन्होंने लगभग 59 वर्ष आठ माह की उम्र में अपने लंबे संघर्ष और निरंतर प्रयासों के बाद टीजीटी संस्कृत शिक्षक के रूप में चयनित होकर सफलता की नई कहानी लिखी है।
शहर के दून पब्लिक स्कूल में शिक्षण कार्य कर रहे विजय कुमार काफी समय से सरकारी नौकरी के लिए प्रयासरत थे। कई बार प्रतियोगी परीक्षाएं दीं, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। 22 सितंबर को वह गौरवपूर्ण क्षण आया, जब लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों उन्हें नियुक्ति-पत्र प्राप्त हुआ, उन्हें शामली जनपद के गांव एलम के इंटर कॉलेज में नियुक्ति मिली है।
उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अनुसार अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में चयनित 3,567 अभ्यर्थियों को नियुक्ति-पत्र वितरित किए गए। मूल रूप से गांव बड़ावद के रहने वाले विजय के लिए यह केवल एक नियुक्ति-पत्र नहीं, बल्कि 27 वर्षों की तपस्या, धैर्य और विश्वास का सम्मान है।
दून पब्लिक स्कूल परिवार ने उनकी इस उपलब्धि पर उन्हें सम्मानित किया। बताते चलें कि शिक्षक की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है, यानी दो साल चार माह उन्हें सरकारी शिक्षक बनने का अवसर मिलेगा।
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