बदायूं : शासन की ओर से भेजी गई स्वास्थ्य विभाग की टीम में शामिल मेडिकल आफीसर डॉ. अभिषेक मिश्रा ने बताया कि कम गहराई पर बो¨रग हुए हैंडपंप से अक्सर मलेरिया या अन्य बुखार का वायरस फैलता है। जिले में बुखार फैलने की मुख्य वजह यही सामने आई है। ऐसे में जरूरी है कि लोग इस पानी को कपड़े धोने में खर्च करें। पीने के लिए इंडिया मार्का हैंडपंप का पानी ही पीने के उपयोग में लाएं। उन्होंने बताया कि जिले में केवल मलेरिया ही नहीं है, अभी तक की जांच में कई मरीज वायरल, टाइफाइड जैसे बुखारों के भी मिले हैं। पिछली बार आई टीम ने मौजमपुर गांव के हैंडपंप का सैंपल लिया था लेकिन प्रधान ने पहले ही उसमें क्लोरीन डलवा दी थी। वहां का सैंपल संदिग्ध है। इसलिए दोबारा सैंपल लिया गया है। अभी तक चार हजार मरीजों की जांच में मात्र 158 मरीजों में ही मलेरिया के लक्षण मिले हैं। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि मलेरिया की महामारी फैली हुई है। कहा कि अभी तक हुई मौतों की वजह स्पष्ट इसलिए नहीं की जा सकती क्योंकि उन शवों के पोस्टमार्टम या बिसरा नहीं मिले। कुछ तो ऐसे हैं, जिनके मेडिकल के अभिलेख भी नष्ट किए जा चुके हैं। इतना जरूर है कि जिनके मेडिकल के दस्तावेज मिले, उनमें अधिकांश स्वाभाविक या अन्य बीमारियों के कारण मौतें हुई हैं। टीम तब तक यहीं रुकेगी, जब तक जिला बुखार मुक्त नहीं हो जाता। फिलहाल मच्छरों, पानी और मरीजों के ब्लड के सैंपल प्रिर्जव किए गए हैं। वहीं टीम में शामिल जेडी डॉ. विकास ¨सघल ने मनकापुर कौर गांव में नालों की रिस्ट और पानी का सैंपल लिया। ताकि लार्वा की स्थिति पता लग सके।

Posted By: Jagran