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यूपी बोर्ड 11वीं-12वीं परीक्षा में बड़ा बदलाव- अब 80 नंबर की होगी लिखित परीक्षा, छात्रों को मिलेगा फायदा

Published: Sat, 22 Aug 2026 05:57 PM (IST)

यूपी बोर्ड की 11वीं और 12वीं की परीक्षाओं का पैटर्न बदल रहा है, जिसमें अब 80 अंकों की लिखित परीक्षा और 20 अंकों का आंतरिक मूल्यांकन होगा।

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HighLights

  1. गैर-प्रायोगिक विषयों में 80 अंक की लिखित परीक्षा होगी।

  2. प्रायोगिक विषयों के अंक 30 से घटाकर 20 किए गए।

  3. रटने की बजाय गहन समझ और विश्लेषण पर जोर।

जागरण संवाददाता बदायूं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत यूपी बोर्ड की 11वीं और 12वीं की परीक्षाओं का पैटर्न बदलने जा रहा है। जिला विद्यालय निरीक्षक लाल जी यादव ने बताया कि अगले शैक्षणिक सत्र से गैर-प्रायोगिक विषयों में 80 अंकों की लिखित परीक्षा और 20 अंकों का आंतरिक मूल्यांकन होगा।

वहीं, जिन विषयों में 30 अंक की प्रायोगिक परीक्षा होती थी, उन्हें घटाकर 20 अंक कर दिया गया है। इस व्यवस्था से छात्रों का मूल्यांकन अधिक व्यापक और व्यावहारिक रूप से हो सकेगा।

प्रश्नपत्र में प्रत्येक यूनिट से सवाल पूछना अनिवार्य

डीआईओएस ने नए प्रश्नपत्र के स्वरूप की विस्तृत जानकारी दी, बताया कि अब प्रश्नपत्र में प्रत्येक यूनिट से सवाल पूछना अनिवार्य होगा और सभी यूनिट्स का अधिभार निश्चित कर दिया गया है। वाह्य विकल्प समाप्त होने से छात्रों के लिए हर यूनिट को गहराई से पढ़ना अनिवार्य हो गया है, जिससे वे किसी भी हिस्से को छोड़ न सकें।

रटने की परंपरा को खत्म करने के उद्देश्य से वर्णनात्मक प्रश्नों की संख्या में कमी की गई है। प्रत्येक विस्तृत उत्तरीय प्रश्न में केवल आंतरिक विकल्प दिए जाएंगे, जो उसी यूनिट, समान उद्देश्य और समान कठिनाई स्तर के होंगे।

नए पैटर्न में इस प्रकार के प्रश्न शामिल किए गए हैं, जिससे छात्रों में मूल्यांकन करने की क्षमता, विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और सृजनात्मक शक्ति का विकास हो सके। यह सुधार विद्यार्थियों को परीक्षा पास करने के लिए महज रट्टा मारने के बजाय विषयों को गहराई से सीखने, समझने और व्यावहारिक रूप से लागू करने के लिए प्रेरित करेगा।

व्यावहारिक मूल्यांकन पर जोर

प्रायोगिक अंक 30 से घटाकर 20 किए गए हैं। नए पैटर्न का मुख्य उद्देश्य छात्रों में केवल रटने की आदत को खत्म करना और उनमें सोचने, समझने, विश्लेषण करने तथा रचनात्मक क्षमता को बढ़ावा देना है ताकि उनका सर्वांगीण विकास संभव हो सके।

नई व्यवस्था से छात्रों में रटने की प्रवृत्ति खत्म होगी। प्रश्नपत्र का नया पैटर्न विद्यार्थियों को हर विषय को गहराई से सीखने और समझने के लिए प्रेरित करेगा।

-लाल जी यादव, डीआईओएस

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