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बदायूं : निलंबित किए जा चुके तत्कालीन सीएमओ डॉ. आशाराम के भविष्य पर 13 दिसंबर को हाईकोर्ट में फैसला होगा। निलंबन के खिलाफ कोर्ट से ही पिछली बार बहाली के आदेश के बाद शासन से पदोन्नति कर संयुक्त निदेशक तो बना दिया गया था, लेकिन वेतन अब तक नहीं निकला रहा। इसी के चलते दोबारा कोर्ट पहुंचे हैं।

बुखार बरपा रहा था कहर, खुद चले गए थे छुट्टी पर

तत्कालीन सीएमओ डॉ. आशाराम 31 अगस्त को यहां से अवकाश पर चले गए थे। वह भी तब जब जिले में बुखार कहर बरपा रहा था। रोजाना दर्जन भर से ज्यादा लोगों की मौत हो रही थी। शासन ने इसी कारण उन्हें निलंबित कर दिया था। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की थी। कोर्ट के आदेश पर उन्हें बहाल कर दिया गया था, लेकिन वित्तीय अधिकार नहीं दिए गए।

जेडी बने, पद मिला न वेतन

बाद में वरिष्ठ के आधार पर शासन ने उन्हें जेडी के पद पर पदोन्नति देकर बरेली में एडी कार्यालय से संबद्ध कर दिया। एडी दफ्तर में पहले से ही पांचों जेडी के पद भरे हैं। एडी के पत्र पर शासन के कहीं भी रिक्त पद पर संबद्ध करने के आदेश के बावजूद न पद मिला सका न वेतन निकल रहा। इसी के खिलाफ वह फिर से कोर्ट गए हैं।

10 दिसंबर को नहीं हो सकी थी सुनवाई

प्रकरण में पहले 10 दिसंबर की तारीख थी, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी। तब कोर्ट ने 13 दिसंबर की तारीख दी और शासन से अब तक की गई कार्रवाई की पत्रावली तलब की है। इसी केस में तलब किए जाने पर प्रभारी सीएमओ डॉ. मंजीत सिंह भी हाईकोर्ट रवाना हो गए।

Posted By: Jagran

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