बदायूं, जेएनएन : संगीत का जब भी जिक्र छिड़ता है। बदायूं के सहसवान घराने का शास्त्रीय संगीत जुबां पर आ जाता है। रामपुर-सहसवानघराने के नाम से मशहूर इस घराने के आठ संगीतकारों को अब तक पद्मश्री व पद्मविभूषण जैसे अवार्ड हासिल हो चुके हैं। कामयाबी की सीढि़यां चढ़ते हुए इस घराने से जुड़े लोग मुंबई जाकर बस गए, वहीं पर शास्त्रीय संगीत के कारवां को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। मौका मिलने पर बदायूं आकर पुरानी स्मृतियां ताजा कर जाते हैं।

उस्ताद इनायत हुसैन खां को रामपुर-सहसवान घराने का संस्थापक माना जाता है। वह नेपाल में राजगायक भी रहे थे। सहसवान घराने का शास्त्रीय संगीत कितना पुराना और समृद्ध है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि वर्ष 1957 में इस घराने के उस्ताद मुस्ताक हुसैन खां को पद्मभूषण अवार्ड मिला। फिर उस्ताद निसार हुसैन खां को 1971 में पद्मभूषण अवार्ड मिला। वर्ष 1991 में उस्ताद गुलाम मुस्तफा खां को पद्मश्री अवार्ड और इसी साल उस्ताद हफीज अहमद खां को भी पद्मश्री मिला। उस्ताद गुलाम मुस्तफा खां को 2006 में पद्मभूषण और 2018 में पद्मविभूषण अवार्ड भी मिल। इनके अलावा उस्ताद गुलाम सद्दीक खां को 2005 में पद्मश्री और उस्ताद राशिद खां को 2006 में पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। इनसेट ::

घराने को बढ़ा रहे उस्ताद गुलाम कादिर

देश के वरिष्ठ शास्त्रीय संगीत गायक रहे उस्ताद गुलाम मुस्तफा खां के साहबजादे उस्ताद गुलाम कादिर खां शास्त्रीय संगीत की इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। विभिन्न देशों में शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम पेश कर चुके हैं। वह कहते हैं कि शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देने के लिए रामपुर-सहसवान घराना लगातार प्रयासरत है। पूरी दुनिया में इस घराने से जुड़े लोग संगीत की खिदमत कर रहे हैं। दुनिया में भारत की पहचान शास्त्रीय संगीत से ही बनी है।

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