संवाद सहयोगी, बिसौली : नगर के श्री प्राचीन रामलीला मैदान में श्रीमछ्वागवत कथा की गंगा में प्रभु भक्तों ने गोते लगाए। प्रखर वक्ता देवी चित्रलेखा ने कथा का महत्व बताते हुए कहा कि तन की खुराक भोजन है तो मन की खुराक सत्संग। जिनका जीवन ही कथा है, ऐसे भक्त प्रभु के हृदय में रहते हैं।

श्री राधारानी प्रेमसेवा समिति की ओर से नगर के श्री प्राचीन रामलीला मैदान में श्रीमछ्वागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा की मर्मज्ञ देवी चित्रलेखा ने पहले तो प्रभु श्रीकृष्ण की स्तुति की। उसके बाद मंच पर मौजूद संत विदेहनंदिनी शरण जी महाराज और अन्य संतों को प्रणाम कर कथा का शुभारंभ किया। कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सभी दैनिक नित्यकर्मों को त्याग कर हमें कथा का श्रवण करना चाहिए। यह शास्त्र सम्मत है। जैसे सोने के गहने की धूल साफ करने के लिए सुनार के पास जाना होता है, वैसे ही प्रभु द्वारा दिए गए स्वर्ण समान जीवन को साफ सुथरा बनाने के लिए सद्गुरू या सत्संग सुनना जरूरी है।

कथामृत की वर्षा करते हुए देवी चित्रलेखा ने भक्तों के जीवन को दो भागों में बांटा। कहा कि भक्त को जब कथा सुनने को मिल जाए तो उनके जीवन में बहार आ जाती है। जब कथा का श्रवण न हो तो भक्त का जीवन पतझड़ के समान हो जाता है। जैसे तन को स्वस्थ रखने के लिए भोजन जरूरी है, वैसे ही मन को स्वस्थ रखने के लिए सत्संग जरूरी है। मन की बीमारी को दूर करने के लिए सिर्फ सत्संग और कथा श्रवण करना चाहिए। सत्संग तो ज्ञान सरोवर है, इसमें स्नान करने के लिए सदा लालायित रहना चाहिए। कहा कि जून और जनवरी माह में गंगा स्नान करने में सिर्फ यही अंतर है कि जनवरी में स्नान करने से पुण्य मिलता है लेकिन आंनद नहीं आता, वहीं पर जून मे गंगा स्नान करने से पुण्य भी मिलता है और आनंद भी आता है। जिन भक्तों को कथा श्रवण मे आंनद आता है, प्रभु के लिए वह प्रिय होते हैं। कथा श्रवण करने वालों में जिला पंचायत अध्यक्षा मधुचंद्रा, पूर्व चेयरपर्सन सुषमा मौर्य, संत शरण जी महाराज, राजाराम शास्त्री, राजीव यादव, मुकेश शर्मा, प्रदीप गुप्ता, कल्लू मिश्रा, राजेश वाष्र्णेय, पूरनमल मिश्र, दुर्गेश वाष्र्णेय, अक्कू रस्तोगी, अशोक वाष्र्णेय, महेंद्र प्रताप यादव, मनमोहन सतवाल, विपनेश मिश्र, सुनीती मिश्रा, पवन कुमार, नीरज सांई, डा.प्रवीण शर्मा, विनय शर्मा आदि मौजूद रहे।

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कथा में महिलाओं की संख्या रही अधिक

जहां एक ओर पांडाल प्रभु भक्तों से खचाखच भरा हुआ था, वहीं पर घरों में बैठे भक्तों ने भी आस्था चैनल पर श्रीमछ्वागवत कथा का श्रवण किया। आस्था चैनल द्वारा साढ़े पांच बजे से लाइव प्रसारण किया गया। सबसे बड़ी बात तो यह रही कि कथा सुनने वालों में महिलाओं की संख्या बहुत थी। इसके साथ ही अन्य स्थानों से भी लोग कथा सुनने आए।

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भजन सुनकर झूम उठे भक्त

कथामृत पान कर रहे प्रभु नाचने लगे। जब देवी चित्रलेखा ने भजन सुनाए तो युवा भक्त झूम उठे। हाथों से बजती तालियों से पूरा पांडाल गूंज उठा। पूरे पांडाल में भक्तिरस छा गया। भावुक दृश्यों पर प्रभु भक्तों की आंखें भी छलछला आयीं। इसके साथ ही नगर में लगे लाउडस्पीकर भी दुकानदारों ने कथामृत का पान किया।

Posted By: Jagran