जेएनएन, बदायूं : बसपा और भाजपा में सत्ता सुख भोगने के बाद सपा की साइकिल सवारी करने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य की सासद बेटी डा. संघमित्रा मौर्य अपने पिता की बात को गलत नहीं कहतीं। उनका मंगलवार को जो अंदाज था वह कहता है कि प्रदेश में दलित-पिछड़ों को लेकर समस्या थी, जो अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक पहुंच गई है। अपनी राजनीतिक राह स्पष्ट कर बोलीं, पीएम गंभीरता से सब देख रहे हैं। जल्द ही समाधान होगा। उन्होंने पूर्व में अपर्णा यादव के भाजपा में आने पर दिए बयान को लेकर कहा कि मेरा उनके भाजपा में आने पर विरोध नहीं लेकिन, कुछ लोग बहू..बेटी में भी जाति भेद देखते हैं. यह वह लोग हैं, जो बिना मागे सलाह देते हैं।

विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान दूर नहीं है, ऐसे में किसी को अपने वर्ग की जातियों का सम्मान याद आ रहा है। कोई टिकट कटने के बाद बागी बन बैठा है। इनमें पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य भी हैं, जिन्हें सरकार में साढ़े चार साल रहने के बाद भाजपा में पिछड़ों की उपेक्षा का मुद्दा याद आया और सपा में चले गए। हालाकि उनकी बेटी और बदायूं सासद डा. संघमित्रा मौर्य न केवल भाजपा में हैं, बल्कि प्रधानमंत्री के प्रति आस्था जता चुकी हैं। इंटरनेट मीडिया पर भावुक पोस्ट लिखकर पिता के निर्णय से इतर खुद के भाजपाई होने का एलान कर चुकी हैं। मंगलवार से वे अपने संसदीय क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में वोट मागने उतर आईं। बिल्सी से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हरीश शाक्य का नामाकन कराने आईं।

चूंकि, पिता-पुत्री की अलग अलग राह पर हर किसी की निगाहें टिकी हैं। लिहाजा, कलक्ट्रेट पर मीडिया ने संघमित्रा को रोककर कई सवाल किए. खासकर पिता स्वामी प्रसाद के आरोप जिसमें पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग को भाजपा में सम्मान नहीं मिल रहा.पर राय जानी। इस पर सासद ने सीधे तो कुछ नहीं कहा, लेकिन पिता की बातों मौन समर्थन करते सधा जवाब दिया। बोलीं- प्रदेश और देश की राजनीति में जमीन- आसमान का अंतर है। पिछड़ों की जो आवाज उठी है, वह प्रधानमंत्री जी तक पहुंच चुकी है। निश्चित रूप से आने वाले दिनों में इसका समाधान हो जाएगा। अपर्णा पर बोलीं पर घुमाकर

फेसबुक पर अपर्णा यादव के भाजपा में आने पर पोस्ट डालकर आपत्ति जताने के सवाल पर उन्होंने अपनी बात फि़र घुमाकर कहा। बोलीं मैंने आपत्ति स्वयं और अपर्णा जी को लेकर नहीं की थी। मेरा सवाल उन फेसबुकियों और बिना मागे सलाह देने वालों से था कि बहन और बेटी की भी कोई जाति होती है.? जो एक पर टिप्पणी करते हैं और दूसरे पर मौन साध लेते हैं। मैं भाजपा की कार्यकर्ता, जनता मेरे साथ

पिता सपा में और वह भाजपा में हैं, उनके भी यहा समर्थक हैं, इनमें कैसे सामंजस्य बैठाएंगी ? इस सवाल पर सासद ने कहा कि मैं भाजपा कार्यकर्ता हूं, निश्चित रूप से अपनी पार्टी को लड़ाऊंगी। मैं यहा की जनप्रतिनिधि हूं। जनता मेरे साथ है। जिले से छह के छह विधायक भाजपा के होंगे। स्वामी प्रसाद के सपा में जाने से भाजपा पर क्या प्रभाव पड़ेगा.? अंत के इस सवाल को अनसुना करते हुए सासद आगे निकल गईं।

Edited By: Jagran