जागरण संवाददाता, बदायूं : गांव रफियाबाद में सदर विधायक/नगर विकास राज्यमंत्री महेश चंद्र गुप्ता के के प्रस्ताव पर 1.20 करोड़ रुपये खर्च करके वृहद गोसंरक्षण केंद्र बनाया गया। इसके संचालन की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान को सौंपी गई। भारी भरकम रकम खर्च करने के बाद भी व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की। जिन्हें सुधारने के लिए प्रधान ने अपनी जेब से रकम खर्च की। जिसका भुगतान जिम्मेदारों ने नहीं किया। आहत होकर उन्होंने प्रधान पद ही त्याग दिया और अपना इस्तीफा वाट्सएप गु्रप पर डीएम को भेज दिया।

क्षेत्रीय लोगों को उम्मीद थी इतना बड़ा बजट मिलने के बाद वृहद गोसंरक्षण काफी आधुनिक तौर पर बनेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। संसाधन तो छोड़ो कार्यदायी संस्था ने गेट व चहारदीवारी का निर्माण भी मिले बजट से नहीं कराया। करीब 210 गोवंशीय पशु वहां पहुंचा दिए। गोशाला की देखरेख का जिम्मा ग्राम प्रधान को सौंपा दिया। ऐसे में प्रधान को गोवंशीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता सताई। उन्होंने विभाग से पत्राचार किया तो जिम्मेदारों ने कहा, अपने पास से ही गेट और बाउंड्रीबाल की जगह तारकशी करा लें। जिसका भुगतान बाद में करा दिया जाएगा। उन्होंने पास से यह काम तो करा दिया, लेकिन जंगली जानवर और पशु तस्करों के आने का भय सताता रहा। चारा-पानी के बजट से लेकर वहां पर तैनात केयरटेकरों को कम भुगतान मिलने से गोवंश पशुओं के देखभाल में दिक्कत आई। आरोप है, यह बात जिम्मेदारों को बताई तो मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने सोमवार को वजीरगंज ब्लॉक क्षेत्र के गांव कल्लिया काजमपुर से डेढ़ गोवंशीय और रखने के निर्देश दिए गए। जिस पर उन्होंने इन पशुओं की देखभाल के लिए पर्याप्त संसाधन न होने की बात कही। जिसे अनसुना किया गया। जिस पर उन्होंने वाट्सगु्रप पर डीएम को इस्तीफा भेजते हुए समस्या बताई।

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वृहद गोसंरक्षण केंद्र में रहने वाले गोवंश पशुओं की देखरेख में हर महीने अपने पास से पांच से सात हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। अब दूसरे गांव से भी गोवंशीयों को यहां भेजा है। इससे मैने अपने प्रधानी पद से इस्तीफा दे दिया है। डीएम को इसकी सूचना वाट्सएप पर दे दी है। लिखित इस्तीफा भी भेज दिया है।

- राजेश कुमार, गोशाला संचालक/ग्राम प्रधान

Posted By: Jagran

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