बदायूं : महिला ग्राम प्रधानों को उनके अधिकार बताने के लिए लंबे अर्से से जद्दोजहद चल रही है। वह पर्दे के अंदर ही रहती हैं और उनके सारे काम उनके पति या फिर बेटे संभालते हैं। अब ऐसा नहीं होगा। घूंघट की ओट से उनको बाहर निकलकर गांव में सफाई व्यवस्था करनी होगी। इसके लिए सभी प्रधानों को व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा जा रहा है। महिला प्रधान खुद ही झाड़ू उठाकर ग्रामीणों को संदेश देंगी कि साफ-सफाई कितनी जरूरी है। इसके लिए फोटोग्राफी के साथ-साथ साफ-सफाई करते हुए प्रधानों की वीडियो क्लिप भी व्हाट्सएप पर अपलोड की जाएगी। इस तरह से स्वच्छ भारत मिशन को प्रभावी करने की पहल सार्थक होगी और प्रधानों को भी उनके दायित्व की जानकारी मिल सकेगी। डीएम दिनेश कुमार ¨सह ने सभी से आह्वान किया है कि वह इस तरह की पहल जल्द से जल्द शुरू कर दें।

ग्राम पंचायत सचिवालय से लेकर ब्लॉक मुख्यालय और जिला मुख्यालय तक महिला प्रधान जरूरी मी¨टगों में भी नहीं पहुंचती हैं। उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए या तो उनके पति या फिर बेटे बैठकों में जाते हैं जहां मिलने वाली सरकारी योजनाओं की जानकारी उन्हीं तक सीमित रह जाती है। घर के अंदर रहने वालीं महिलाओं को सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी नहीं मिल पाती है। इसके साथ-साथ उनका प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकांश लोग गांव में पेशबंदी के मामलों में ही व्यस्त रहकर अधिकारियों तक शिकायतें पहुंचाते रहते हैं इससे गांव का विकास भी अधर में अटक जाता है। इस बात पर गौर करते हुए महा श्रमदान दिवस पर डीएम ने योजना तैयार करते हुए आदेश-निर्देश जारी किए हैं कि महिला ग्राम प्रधानों को अब खुद ही अपनी जिम्मेदारी का निर्वाहन करना होगा। वह घूंघट से बाहर निकलकर गांव के बीच जाकर लोगों की समस्याएं सुनेंगी तो हर दिन स्वच्छ भारत मिशन को प्रभावी करने के लिए खुद ही अभियान की शुरूआत करेंगी। गांव की प्रधान जब खुद झाड़ू उठाएंगी तो अन्य लोग भी इस मुहिम से जुड़ेंगे तभी हमारे यहां बदलाव दिखाई देगा। इसके साथ-साथ पूरे कार्य की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी व्हाट्सएप ग्रुप पर अपलोड करनी होगी। ताकि इस व्यवस्था में पारदर्शिता आ सके। गांव में होने वाले पौधरोपण अभियान में भी प्रधान सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

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Posted By: Jagran