बदायूं : जिला अस्पताल में फार्मासिस्ट की इंटर्नशिप कर चुके युवक की स्कूटी पुलिसिया पचड़े में फंस गई है। वजह है कि स्कूटी की डिक्की में सरकारी दवाइयां मिली थीं। सीएमएस ने पहले दवाइयां चोरी होने की तहरीर पुलिस को दी। जबकि बाद में इमरजेंसी मेडिकल ऑफीसर ने यह दवाइयां खुद मरीज को देने का पत्र पुलिस को भेज दिया। नतीजतन किसी तरह की कानूनी कार्रवाई तो नहीं हुई लेकिन स्कूटी पुलिस ने दो दिन से नहीं छोड़ी है।

शहर के मुहल्ला नाहर खां सराय निवासी लियाकत की पत्नी राहील (55) कई दिन से बीमार चल रही हैं। उन्होंने जिला अस्पताल में तैनात ईएमओ डॉ. नितिन सिंह को दिखाया और तब से वही राहील का इलाज कर रहे हैं। राहील का बेटा जसद हुसैन जिला अस्पताल में इंटर्न फार्मासिस्ट रह चुका है। ऐसे में दवाएं घर पर ही मरीज को लगाने की सलाह चिकित्सक ने दी। साथ ही कुछ दवाएं लिखने के साथ ही उन्हें अस्पताल से मुहैया करा दिया गया। - इधर, ईएमओ डॉ. नितिन सिंह ने पूरा मामला सीएमएस को बताया तो वह चुप हो गए। वहीं ईएमओ ने अपनी तरफ से एक पत्र कोतवाली पुलिस को दिया, इसमें स्पष्ट कहा गया कि दवा उनके द्वारा दी गई थी। पुलिस को दोनों पत्र मिल गए लेकिन अब उस स्कूटी को पुलिस अभी तक कब्जे में लिए हुए है।

यहां बिगड़ा मामला

- जसद ने यह दवाएं अपनी स्कूटी की डिक्की में रख लीं। इस दौरान अस्पताल में कार्यरत एक अन्य महिला कर्मचारी की स्कूटी की चाबी जसद की स्कूटी की डिक्की में लगी और उन्होंने धोखे में डिक्की खोल ली तो अंदर दवाएं रखी देखीं। कुछ देर बाद ही मामला सीएमएस डॉ. बीबी पुष्कर तक पहुंचा तो वह भी मौके पर आ गए और आनन-फानन में पुलिस बुलाकर स्कूटी सौंप दी। साथ ही तहरीर भी पुलिस को दे दी।

वर्जन

स्टाफ ने बाद में बताया कि दवाएं चोरी नहीं हुई थीं। इसलिए कोतवाल को मौखिक तौर पर पूरी स्थिति से अवगत करा दिया है। स्कूटी अब पुलिस को छो़ड देना चाहिए, क्योंकि कोई अपराध नहीं बनता।

डॉ. बीबी पुष्कर, सीएमएस

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Posted By: Jagran

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