जागरण संवाददाता, बदायूं : बारिश का मौसम खत्म होने के साथ ही अब जिला अस्पताल में भी मरीजों की संख्या घटने लगी हैं, लेकिन मलेरिया, टाइफाइड समेत वायरल के मरीज अभी भी पहुंच रहे हैं। सोमवार को जिला अस्पताल में बुखार से ग्रसित बच्ची की मौत होने का मामला भी सामने आया। वहीं, चिकित्सक एक पखवाड़ा पहले जैसे हालात नहीं होने का दावा कर रहे हैं।

ब्लाक समरेर के गांव कालाकूड़ा निवासी गजेंद्र की 10 माह की बेटी मौसमीन कई दिन से बुखार से ग्रसित थी। परिजन उसे सोमवार को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां घंटेभर भर्ती रहने के बाद इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई। यह देख परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। बाद में परिवार वाले शव को लेकर अपने गांव लौट गए। वहीं, जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राजेश वर्मा ने बताया, मौसम में बदलाव के कारण खाद्य पदार्थों के खराब होने की संभावना कम हो गई है। वहीं इस मौसम में संक्रमण का खतरा भी कम हो जाता है। इस मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ने लगती है। बुखार के मरीज तो हैं लेकिन स्थिति पिछले दिनों जैसी भयावह नहीं है।

डेंगू का संकट बरकरार

- बुखार भले ही कम हो गया हो लेकिन इस मौसम में डेंगू का संकट बरकरार है। यह मच्छर इसी मौसम में ही पनपता है। इसलिए लोगों को चाहिए कि अभी भी पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें और घरों के आसपास जलभराव न होने दें। सफाई व्यवस्था भी बेहतर रखें। ताकि मच्छर न पनपे।

वार्डों में कुत्तों का आतंक

- अस्पताल के कई वार्डों में देखरेख के अभाव में कुत्ते घुस आते हैं। मरीजों के बेड के नीचे कुत्ते बैठते हैं। ऐसे में तीमारदारों समेत मरीजों को इनके काटने का डर भी रहता है। बावजूद इसके जिम्मेदार इस समस्या को नजरांदाज किए हुए हैं।

---------

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप