बदायूं : बुखार, मलेरिया, प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम। हर दिन दर्जनों को चपेट में ले रही हैं यह बीमारियां। स्वास्थ्य विभाग के तमाम इंतजाम भी इन्हें बाहर का रास्ता नहीं दिखा सके। अब एक और अनचाहे मेहमान डेंगू ने भी दस्तक दे डाली। महकमे के पास काबू पाने के तो छोड़िए, रोकथाम के इंतजाम भी नहीं हैं। वह भी तब जब 32 लोगों में अब तक डेंगू के लक्षणों की जांच में पुष्टि हो चुकी।

बुखार से जा चुकी हैं 200 से अधिक जान

जानलेवा बुखार से दर्जनों लोगों की मौत के बाद विभाग की नींद खुली थी। जब तक विभाग हरकत में आया, इंतजाम शुरू किए, तब तक मौत का आंकड़ा 100 के पार जा चुका था। सीएमओ तक निलंबित हो चुके हैं। अब तक 200 से अधिक की जान जा चुकी है। जगत, समरेर और सलारपुर ब्लॉक सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

डेंगू वार्ड ही नहीं तैयार

32 मरीजों में डेंगू की पुष्टि के बावजूद जिला अस्पताल में अलग से वार्ड नहीं बन सका है। शहर आए संयुक्त निदेशक ने 10 दिन पहले ही अलग वार्ड बनाने के निर्देश दिए थे। जिम्मेदार रोजाना बुखार के 50 नए मरीजों के आने के चलते कोई वार्ड खाली न होने का हवाला दे रहे हैं। जबकि 20 सितंबर से डेंगू का सीजन शुरू होने की आशंका जताई गई है।

32 लोगों मे हो चुकी है पुष्टि

जिले में बुखार के डेंगू के लक्षण वाले 32 मरीजों में से 10 मरीज जिला अस्पताल में ही मिले थे। इनमें से दो को रेफर किया था। बाकी को ठीक किया जा चुका है।

यह हैं लक्षण

-डेंगू में मरीज को लगातार बुखार रहता है

-शरीर के जोड़ों में बहुत दर्द रहता है, थकावट रहती है

-स्वस्थ व्यक्ति में डेढ़ से चार लाख प्लेटलेट होते हैं, डेंगू होने पर इनकी संख्या तेजी से कम होती है

-रक्त कोशिकाएं टूटने व सूखने लगती हैं

-मरीज को ब्ली¨डग भी होने लगती है और हेमरेज की आशंका बन जाती है

-लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें, समय से इलाज न मिलने पर मौत भी संभव है वर्जन ::

डेंगू की जांच किट नहीं है, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। हालांकि उसमें मरीज के प्लेटलेट कम होते हैं जो खून की जांच से ही पता लग जाते हैं। अगर किट नहीं है तो मंगवाई जाएगी।

- डॉ. यूवी ¨सह, प्रभारी सीएमएस

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