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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 01, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जिले में डेंगू की दस्तक, 10 मरीज मिले

By JagranEdited By:
Published: Sat, 01 Sep 2018 11:39 PM (IST)

जिले में मलेरिया व वायरल बुखार की चपेट में आने से हो रहीं मौतों के साथ अब डेंगू ने दस्तक दे दी है।

जिले में डेंगू की दस्तक, 10 मरीज मिले
जिले में डेंगू की दस्तक, 10 मरीज मिले

बदायूं : जिले में मलेरिया व वायरल बुखार की चपेट में आने से हो रहीं मौतों के साथ अब डेंगू ने भी दस्तक दे दी है। जिला अस्पताल में 10 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। जबकि मलेरिया व वायरल का प्रकोप भी लगातार बढ़ता जा रहा है। जिला अस्पताल की लैब में रोज करीब सवा सौ मरीजों की जांचें होती हैं, इनमें 80 फीसद लोग मलेरिया की चपेट में हैं।

बेकाबू बुखार से जहां एक ओर जिलेभर में अब तक 32 लोग जान गवां चुके हैं। वहीं जिला अस्पताल मलेरिया व वायरल के मरीजों से खचाखच भरा हुआ है। मौजूदा स्थिति यह है कि कोई भी वार्ड ऐसा नहीं बचा है, जहां मरीजों को भर्ती करने की जगह हो। इसी बीच जानलेवा डेंगू ने भी दस्तक दे दी। बुखार के संग डेंगू ने भी लोगों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है।

अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राजेश वर्मा ने बताया कि डेंगू के दो मरीजों को रेफर करना पड़ा। जबकि बाकी के मरीजों को दवाइयां दी जा रही हैं। इनकी हालत में सुधार भी धीरे-धीरे आ रहा है।

डेंगू ज्वर के लक्षण

डेंगू होने पर मरीज को लगातार बुखार रहता है। शरीर के जोड़ों में बहुत ज्यादा दर्द रहता है। थकावट बनी रहती है। साधारण व्यक्ति में डेढ़ से चार लाख प्लेटलेट होते हैं। जबकि डेंगू के मरीज में प्लेटलेट लगातार कम होते जाते हैं और रक्त कोशिकाएं टूटने व सूखने लगती हैं। मरीज को ब्ली¨डग भी होने लगती है। ऐसे में हेमरेज की आशंका भी बन जाती है। समय रहते इलाज न मिला तो उसकी मौत भी संभव है। अस्पताल में नहीं बना अलग वार्ड

जिला अस्पताल में डेंगू के मरीजों को भर्ती करने के लिए अलग से कोई वार्ड अभी नहीं बना है। वो इसलिए अस्पताल में बैड खाली नहीं हैं। हालांकि शुक्रवार को निरीक्षण करने के दौरान जेडी ने तीन दिन में डेंगू वार्ड खोलने का निर्देश दिया है। वर्जन ::

डेंगू वार्ड एक दो दिन में बन जाएगा। आमतौर पर डेंगू बारिश के बाद फैलता है। अक्टूबर और नवंबर में आशंका ज्यादा रहती है। फिलहाल मलेरिया के साधारण मरीज डिस्चार्ज किए जाएंगे। इसके बाद बैड खाली होते ही डेंगू वार्ड बनाया जाएगा। तभी डेंगू के संदिग्ध मरीज उसी में शिफ्ट किए जाएंगे।

- डॉ. सुकुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल