- पुलिस महकमा समेत अन्य प्रमुख विभागों ने तैयार किया डाटा

- पशुधन विभाग ने अब तक 75740 पशुओं की कराई है टैगिग

जागरण संवाददाता, बदायूं : वैश्विक महामारी के खिलाफ जंग लड़ रहे कोरोना योद्धाओं ने लॉकडाउन के दौरान जिले में करीब बीस हजार पशु-पक्षियों की जान बचाई है। लॉकडाउन के बाद पुलिस महकमा समेत सभी विभागों ने डाटा तैयार किया है। डाटा में बताया गया है कि किस तरह से उन्होंने भूखे-प्यासे और बीमार हुए पशु-पक्षियों को चारा-पानी देने के साथ ही दवाएं देकर उनकी जान बचाई है। इसका डाटा शासन को भी भेजा गया है। बताया गया है कि किस तरह से किस स्थान पर पशु पक्षियों की जान बचाई गई। इसके अलावा कितने पशुओं की टैगिग कर उनको सुरक्षित स्थान पर रखा गया है।

कोरोना महामारी के बीच लॉकडाउन शुरू होने के साथ ही लोग घरों में कैद हो गए थे। बाहर पशु-पक्षियों के सामने भी भोजन का संकट उत्पन्न हो गया था। ड्यूटी पर तैनात पुलिस और विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी ही निकल रहे थे। अधिकारी, कर्मचारियों ने जगह-जगह भूख-प्यासे पशु-पक्षियों को को भोजन दिया, बीमार पशुओं का उपचार कराया। पुलिस महकमा समेत पशु-पक्षियों की सेवा करने वाले विभागों ने इसका डाटा तैयार किया है कि किस तरह उन्होंने पशुओं की जान बचाई। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एके जादौन के अनुसार लॉकडाउन के दौरान 19447 बीमार पशु-पक्षियों का उपचार कराया गया। इनमें छह विभागों के कर्मियों ने 307 बीमार पशुओं का उपचार कराया। पशु कल्याण संस्थाओं ने 463 पशुओं का उपचार कराकर उनकी जान बचाई। 20 नगर पालिका और नगर पंचायतों के कर्मचारियों ने 756 पशुओं का उपचार कराया। इस दौरान पशुओं की टैगिग का कार्य भी सतत चलता रहा। अब तक 75740 पशुओं की टैगिग कराई जा चुकी है। जिले में 123 गो संरक्षण केंद्र चल रहे हैं, जिनमें 6847 पशुओं का संरक्षण किया जा रहा है। इनके लिए लोगों ने 30652 क्विटल भूसा दान किया है। वर्जन ::

लॉकडाउन के दौरान जब लोग घरों में रह रहे थे तब पशुधन विभाग, पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और नगर निकाय के अधिकारी-कर्मचारी पशु-पक्षियों के लिए चारा, भोजन और उपचार की व्यवस्था करते रहे। गांवों में लोगों ने भूसा दान देकर गोशाला संचालन में काफी मदद की।

- डॉ. एके जादौन, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी

Posted By: Jagran

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