वजीरगंज : गैर इरादतन हत्या के मामले में फंसे दो दारोगा समेत एक सिपाही व होमगार्ड को पुलिस की विवेचना में क्लीनचिट मिल गई है। चारों के खिलाफ लगे आरोप को विवेचक ने सिरे से नकार दिया है। जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत कुछ अन्य दस्तावेज आधार बनाए गए थे। पुलिस का दावा है कि चारों का इस मामले में कोई दोष नहीं है।

कोतवाली बिसौली की दबतोरी चौकी क्षेत्र के गांव संग्रामपुर निवासी अकबर नाम के युवक को आठ अगस्त को पुलिस टीम पकड़ने गई थी। खेत पर काम करते वक्त टीम ने उसे पकड़ा और अपने साथ ले जाने लगी। जबकि उसके पिता मशकूर (60) ने विरोध किया तो टीम में शामिल दोनों दारोगा सुनील कुमार व अजीत कुमार के अलावा सिपाही सुरेश और एक होमगार्ड उस पर भिड़ गए। चारों ने उसे तब तक पीटा, जब तक उसकी मौत न हो गई।

वहीं इस घटना के बाद गांव वाले एकत्र हुए तो पुलिसकर्मी वहां से सरक लिए। आक्रोश के मद्देनजर अधिकारियों ने स्थिति संभाली और अकबर की तहरीर पर चारों आरोपितों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया। हार्टअटैक से हुई थी पुष्टि

- पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया तो हार्ट अटैक से मशकूर की मौत की पुष्टि हुई थी। पुलिस इसे साधारण मान रही थी। जबकि जानकारों का कहना था कि चारों ने वहां इतना ज्यादा शोर मचाते हुए खींचतान और मारपीट की, जिससे मशकूर दहशत में आ गया और यही दहशत हार्टअटैक की वजह बन गई। सभी को निलंबित किया था। यह बना एफआर का आधार

- इधर, मामले की विवेचना वजीरगंज पुलिस को ट्रांसफर की गई थी। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को आधार बनाया, क्योंकि विवेचक का तथ्य था कि हार्टअटैक किसी भी मुद्रा में आ सकता है। कुछ गांव वालों के शपथपत्र भी लिए गए। जिन्होंने इस घटनाक्रम को देखा था। इन्हीं तथ्यों के आधार पर खाकी पर लगे खून के दाग फिलहाल धो डाले गए हैं। वर्जन

मामले की हर पहलू पर जांच की गई थी। इसमें पुलिसकर्मियों का कोई दोष नहीं मिला। साक्ष्यों के आधार पर ही एफआर लगाई गई है।

संजय सिंह, इंस्पेक्टर वजीरगंज

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