बदायूं : जिले में गंदगी का साम्राज्य चारों ओर फैला हुआ है। यह बात किसी से छिपी नहीं है। यहां पर पूर्व में जो टीम आई थी उसकी जांच रिपोर्ट से शासन संतुष्ट नहीं है। इस वजह से अब दूसरी टीमों को यहां भेजा जा रहा है। टीम के सामने किस तरह की रिपोर्ट जिला प्रशासन पेश करे इसको लेकर सभी मुश्किलों में आ गए हैं, क्योंकि वह टीम गांव-गांव जाकर वास्तविकता को देखेगी। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार की टीम ने अगर धरातल पर सही परख की तो स्वच्छ भारत मिशन के प्रभारी नहीं बच पाएंगे।

केंद्र में मोदी सरकार आते ही प्रधानमंत्री ने सबसे ज्यादा जोर गंदगी दूर करने पर दिया था। स्वच्छ भारत मिशन का आगाज करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने खुद ही झाड़ू पकड़ी तो देश भर में जागरूकता की ऐसी अलख जागी कि सरकारी अमले से लेकर सभी लोग झाड़ू पकड़कर मैदान में आ गए। स्वच्छता कार्यक्रम को प्रभावी करने के लिए हर नगर निकाय में स्वच्छ भारत मिशन के प्रभारी नियुक्त किए गए तो देहात क्षेत्र की व्यवस्था दुरुस्त करने को डीपीआरओ कार्यालय से एक प्रभारी नियुक्त किया गया। डीपीआरओ कार्यालय से नियुक्त किए गए प्रभारी ने साफ-सफाई पर गौर न कर सफाई कर्मचारियों के ट्रांसफर पो¨स्टग में ज्यादा ध्यान दिया। तबादले के नाम पर मोटी रकम मिलने की वजह से उन्होंने और किसी काम को नहीं देखा। नतीजा यह निकला कि हर गांव दलदल में बदलने लगा। बदायूं की स्थिति साफ-सफाई के मामले में काफी दयनीय पाई गई। इसकी शिकायत ऊपर तक पहुंची तो केंद्र सरकार ने विशेष टीम का गठन कर यहां जांच को भेजा है। टीम के आने की सूचना मिलते ही सरकारी अमले में खलबली मच गई है।

Posted By: Jagran