दुश्मन ही बन गया 'अपना'? नेताओं की पाला-बदली से BJP-सपा कार्यकर्ताओं के सामने खड़ा हुआ धर्मसंकट
बिसौली में नेताओं के पाला बदलने से भाजपा और सपा कार्यकर्ताओं के सामने धर्मसंकट खड़ा हो गया है। आशुतोष मौर्य ...और पढ़ें

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HighLights
आशुतोष मौर्य की क्रास वोटिंग के बाद भाजपा में शामिल होने की चर्चा अब और तेज
अब कुशाग्र सागर के भाजपा छोड़ने और सपा में जाने की अटकलों से बढ़ गई हलचल
अंकित गुप्ता, बदायूं। बिसौली की सियासत में नेता पाला बदलने की राह पर हैं और कार्यकर्ता अपनी ही पार्टी में किसके साथ खड़े हों, इसे लेकर उलझन में हैं। वर्ष 2022 में सपा के टिकट पर विधायक बने आशुतोष मौर्य की राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग के बाद भाजपा से नजदीकियां हुईं तो सपा कार्यकर्ता नेतृत्व को लेकर असमंजस में पड़ गए।
दूसरी ओर, उनसे महज 1834 मतों से चुनाव हारने वाले भाजपा के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर पार्टी में बने रहे। अब कुशाग्र के भाजपा से इस्तीफे और सपा में शामिल होने की अटकलों ने सियासी गणित को फिर उलझा दिया है।
सबसे बड़ा सवाल उन सपाइयों के सामने है, जो कुशाग्र और आशुतोष का विरोध करते आए हैं। जिस नेता के खिलाफ संघर्ष किया, अब उसी को पार्टी में स्वीकारने का दबाव उनके लिए नई चुनौती बन गया है।
वर्ष 2022 के राज्यसभा चुनाव में आशुतोष मौर्य की क्रास वोटिंग के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। इसके बावजूद भाजपा से चुनाव हारने वाले कुशाग्र सागर पार्टी में बने रहे। इससे क्षेत्र में भाजपा के कार्यकर्ताओं के सामने भी स्थिति असहज रही।
एक ओर विधायक की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर चर्चाएं थीं तो दूसरी ओर पूर्व विधायक के साथ संगठन में काम करने वाले कार्यकर्ताओं की अपनी निष्ठा थी। नतीजा यह हुआ कि कार्यकर्ताओं के बीच एकराय बनाने की चुनौती बनी रही।
सपा के कार्यकर्ताओं की मुश्किल भी कम नहीं है। बुधवार को कुशाग्र सागर ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता और सभी दायित्वों से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उनके सपा में शामिल होने की चर्चाएं शुरू हो गईं।
ऐसे में यदि कुशाग्र सपा में आते हैं तो पुराने विरोधियों के लिए उन्हें अपने नेता के रूप में स्वीकार करना आसान नहीं होगा। इंटरनेट मीडिया पर भी इस संभावित बदलाव को लेकर विरोध के स्वर दिखाई दे रहे हैं।
कुछ कार्यकर्ता खुलकर उनके सपा में आने का विरोध किया है और नहीं चाहते कि पार्टी उन्हें अपने साथ जोड़े। हालांकि, अंदरखाने की चर्चा है कि सपा के वरिष्ठ नेताओं ने कुछ कार्यकर्ताओं से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया है।
बताया जा रहा है कि उन्हें व्यक्तिगत विरोध से ऊपर उठकर सरकार बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखने की बात कही गई है। फिलहाल, कुशाग्र के अगले राजनीतिक कदम और आशुतोष मौर्य की आगे की रणनीति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
लेकिन इतना तय है कि बिसौली में नेताओं के बदलते सियासी समीकरणों के बीच कार्यकर्ताओं के लिए अपनी पुरानी निष्ठा, विरोध और नए राजनीतिक समीकरणों के बीच तालमेल बैठाना आसान नहीं रहने वाला है।
क्षेत्र में दोनों का राजनीतिक प्रभाव, मात्र 1834 मतों से हारे थे कुशाग्र
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में आशुतोष मौर्य ने कुशाग्र सागर को महज 1834 मतों से हराया था। इस करीबी मुकाबले के बाद से ही बिसौली की राजनीति में दोनों नेताओं का प्रभाव और उनके समर्थकों की भूमिका अहम रही है। अब आशुतोष की भाजपा से नजदीकी की चर्चाओं और कुशाग्र के संभावित सपा में जाने से दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के सामने नई चुनौती है।
