बिसौली में 4 साल बाद भी वादे अधूरे: 2000 छात्रों पर सिर्फ 3 शिक्षक, बाइपास और रोडवेज बस सेवा के लिए तरस रही जनता
Uttar Pradesh MLA Report Card: बिसौली विधायक आशुतोष मौर्य के चार साल के कार्यकाल में सड़क और बिजली योजनाओं पर ...और पढ़ें

आशुतोष मौर्य
HighLights
सड़क और बिजली योजनाओं पर पहल हुई, लेकिन जाम, रोडवेज, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे अब भी जनता के लिए सबसे बड़ी चुनौती
प्रमोद मिश्रा, बिसौली (बदायूं)। विधानसभा चुनाव के दौरान बिसौली को जाम से मुक्ति दिलाने, परिवहन व्यवस्था बेहतर करने और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के जो दावे किए गए थे, उनमें कई महत्वपूर्ण वादे चार साल बाद भी अधूरे हैं। विधायक आशुतोष मौर्य ने मुख्यमंत्री से कई बार मुलाकात कर नगर बाइपास, शाहबाद-कछला मार्ग पर सोत नदी के नए पुल, ग्रामीण सड़कों और बिजली परियोजनाओं की पैरवी की।
कुछ योजनाओं में प्रगति भी हुई और शाहबाद-कछला मार्ग पर जर्जर पुल के पास करीब 1.44 करोड़ रुपये की लागत से डायवर्जन की स्वीकृति मिली। विधायक निधि से कई सड़क, नाली और सामुदायिक निर्माण कार्य भी कराए गए, लेकिन जिन मुद्दों का सीधा सरोकार आम जनता से है, वे अब भी अधूरे हैं।
सबसे बड़ा मुद्दा नगर बाइपास का है। पिछले तीन वर्षों में लोक निर्माण विभाग कई बार इसका एस्टीमेट शासन को भेज चुका है। विधायक भी मुख्यमंत्री के सामने लगातार यह मांग उठाते रहे, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।
नतीजा यह है कि बिसौली नगर में रोजाना लंबा जाम लगता है और व्यापारी, छात्र, मरीज व आम लोग घंटों परेशान होते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बाईपास बन जाए तो नगर की वर्षों पुरानी समस्या खत्म हो सकती है। रोडवेज बस सेवा का मामला भी ठंडे बस्ते में है।
बिसौली से ऑनला, आसफपुर, दबतोरी, बिलसी, सहसवान और इस्लामनगर जैसे प्रमुख मार्गों पर आज भी नियमित रोडवेज बसें नहीं चलतीं। इसका सीधा असर विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, किसानों और व्यापारियों पर पड़ रहा है। बेहतर परिवहन के अभाव में क्षेत्र का आर्थिक और सामाजिक विकास भी प्रभावित हो रहा है।
शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर भी तस्वीर पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। नगर में डिग्री कालेज खुलने के बावजूद शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। करीब दो हजार छात्रों के लिए केवल तीन शिक्षक होने की बात स्थानीय लोग उठा रहे हैं।
वहीं क्षेत्र में कोई बड़ा उद्योग स्थापित नहीं हो सका, जिससे युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है। चार वर्षों में विकास कार्यों की पहल जरूर हुई, लेकिन बिसौली की पहचान बने जाम, परिवहन, शिक्षा और रोजगार जैसे मूल मुद्दों पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके। अब चुनाव नजदीक आने के साथ जनता इन्हीं अधूरे वादों का हिसाब मांग रही है।
विकास के लिए शासन पर किए लगातार प्रयास : आशुतोष मौर्य
विधायक आशुतोष मौर्य का कहना है कि बिसौली के विकास के लिए उन्होंने लगातार शासन स्तर पर प्रयास किए हैं। मुख्यमंत्री से कई बार मुलाकात कर बाईपास, सोत नदी पर नए पुल, ग्रामीण सड़कों और बिजली परियोजनाओं की मांग रखी गई। कई सड़कों के प्रस्ताव स्वीकृत हुए और विधायक निधि से भी विकास कार्य कराए गए।
उनका कहना है कि बाईपास जैसी बड़ी परियोजनाएं शासन स्तर की स्वीकृति पर निर्भर हैं, इसलिए समय लग रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि सभी लंबित योजनाओं को पूरा कराने के लिए प्रयास लगातार जारी हैं और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास किया जाएगा।
आज भी शुरू नहीं हुई बस सेवा : कुशाग्र सागर
भाजपा के पूर्व प्रत्याशी कुशाग्र सागर का कहना है कि बिसौली की सबसे बड़ी जरूरत नगर बाईपास और बेहतर परिवहन व्यवस्था है। उनके अनुसार बाईपास के लिए सर्वे और नाप तक हुई, लेकिन परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। वहीं रोडवेज बस सेवा आज भी शुरू नहीं हो पाई। उनका कहना है कि जब तक बाईपास, बस सेवा और रोजगार के अवसर नहीं बढ़ेंगे, तब तक क्षेत्र का समग्र विकास अधूरा ही रहेगा।
