₹116 करोड़ खर्च, फिर भी सड़कों पर मौत का करंट! बदायूं में अंडरग्राउंड केबल बनी जी का जंजाल, 350 जंक्शन बॉक्स बने खतरा
बदायूं में 116 करोड़ रुपये की लागत से बिछाई गई अंडरग्राउंड विद्युत लाइनें अब हादसों का कारण बन रही हैं, ...और पढ़ें

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HighLights
बरसात में उतरता है करंट, कई बेजुबानों की मौत, खतरे में मासूम
आशीष देव मिश्रा, बदायूं। शहर की सड़कों के नीचे धमनियों की तरह बिछी अंडरग्राउंड विद्युत लाइन अब हादसों का सबब बन रही है। करोड़ों रुपये की योजना धरातल पर आने के बाद उम्मीद थी कि आंधी-पानी में बिजली गुल होने के झंझट से राहत मिलेगी। लेकिन आज वही राहत लोगों के गले की फांस बन चुकी है।
सड़कों और गलियों में लगे दर्जनों लोहे के जंक्शन बाक्स खुले पड़े हैं। बारिश होते ही इनमें करंट उतर आता है। कई बेजुबान पशु जान गंवा चुके हैं और खौफ के मारे स्वजन ने बच्चों को गलियों में खेलने से रोक दिया है।

शहर में आंधी-तूफान के दौरान होने वाली ट्रिपिंग को रोकने और हादसों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से अंडरग्राउंड विद्युत लाइन बिछाई गई थी।नियमानुसार इन जंक्शन बाक्सों में फाइबर इंसुलेशन, अर्थिंग और वाटरप्रूफिंग सीलिंग बेहद जरूरी है।
मगर धरातल पर देखरेख के अभाव में ये इंसुलेशन उखड़ चुके हैं। कहीं केबल जमीन से बाहर झांक रही हैं, तो कहीं नंगे तार सीधे राहगीरों के पैरों के पास बिखरे पड़े हैं।
इस योजना की शुरुआत 2016 में हुई थी और 2018 के अंत तक 116 करोड़ रुपये फूंककर काम पूरा दिखाया गया। सप्लाई शुरू होते ही जब हादसे बढ़े, तो मामला शासन तक पहुंचा।

विजिलेंस जांच भी हुई और कार्यदायी संस्था राज कारपोरेशन लिमिटेड ने खामियां सुधारने का दावा भी किया। जिसके कारण हैंडओवर प्रक्रिया में भी महीनों की खींचतान चली। लेकिन अफसोस, आठ साल बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
81 वर्ग किलोमीटर में फैले शहर में 350 से ज्यादा जंक्शन बाक्स जिंदगी के लिए खतरा बने हुए हैं। लोग हर कदम डर-डरकर उठाने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदार सिर्फ कागजी मरम्मत का दिलासा दे रहे हैं।
समय के साथ उखड़ी जंक्शन बाक्सों की सीलिंग
नियमों के तहत लोहे के जंक्शन बाक्स में इंसुलेशन और वाटरप्रूफिंग अनिवार्य है। लेकिन धरातल पर सीलिंग उखड़ चुकी है। जरा सी बारिश में लोहे की बाडी में करंट उतर आता है। आए दिन मूक पशु इसकी चपेट में आकर दम तोड़ चुके हैं।
आगरा समेत कुछ शहरों में जंक्शन बाक्स से करंट न उतरे इसके लिए प्लास्टिक के जंक्शन बाक्स लगाए गए हैं। इसपर अधिकारियों का कहना है कि प्लास्टिक के विद्युत बाक्स फाल्ट होते ही जल जाते हैं। इस कारण ही लोहे के जंक्शन बाक्स लगाए गए हैं।
शहर के साथ ही सहसवान में भी बिछी थी अंडरग्राउंड विद्युत लाइन
शहर के साथ ही सहसवान में भी 2016 में अंडरग्राउंड विद्युत लाइन बिछाई गई थी। लेकिन सहसवान के हालात भी शहर से जुदा नहीं हैं। सहसवान में भी गलियों में विद्युत लाइनें खुली पड़ी हैं तो कहीं विद्युत जंक्शन बाक्स जर्जर हैं। जिससे हादसों का डर बना रहता है।
कार्यदायी संस्था ने मजबूती के लिए लोहे के बाक्स लगाए थे, जिनमें इंसुलेशन समय के साथ उखड़ गया। प्लास्टिक के बाक्स जल्दी जल जाते हैं। जिन स्थानों पर जंक्शन बाक्स खुले हैं, उन्हें अनुरक्षण कार्य के माध्यम से बंद कराया जाएगा।
- अजय कुमार, अधीक्षण अभियंता
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