बदायूं में थाने के CEIR पोर्टल का आईडी-पासवर्ड बेचकर होती थी वसूली, सिपाही समेत तीन पर FIR दर्ज
बदायूं में एक सिपाही ने CEIR पोर्टल का आईडी-पासवर्ड जनसेवा केंद्र संचालक को देकर गुम मोबाइल फोन की लोकेशन पता कर वसूली का धंधा चलाया।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
सिपाही ने CEIR पोर्टल का ID-पासवर्ड जनसेवा केंद्र संचालक को दिया।
गुम मोबाइल फोन की लोकेशन से दोतरफा वसूली की जाती थी।
सिपाही जावेद समेत तीन पर FIR, सिपाही निलंबित किया गया।
जागरण संवाददाता, बदायूं। जरीफनगर थाने के सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (सीईआइआर) पोर्टल के जरिये सिपाही जावेद वसूली कराने लगा। उसने पोर्टल का आईडी-पासवर्ड जनसेवा केंद्र संचालक प्रेमपाल को दिया। वह इससे गुम मोबाइल फोन की लोकेशन पता कर दोतरफा वसूली करता था।
जिससे मोबाइल फोन बरामद होता, उसे जेल भेजने की धमकी देकर रुपये लेता। जिनका फोन बरामद होता, उनसे सिपुर्दगी के बदले रकम मांगता था। रविवार को वसूली का खेल बेपर्दा होने पर सिपाही जावेद, प्रेमपाल, उसके साथी रंजीत पर प्राथमिकी लिखी गई। सिपाही को निलंबित भी कर दिया गया है।
हरीश बाबू का मोबाइल फोन खो गया था। उन्होंने प्रेमपाल उर्फ बंटी के जनसेवा केंद्र पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी। हरीश के अनुसार, चार सितंबर को प्रेमपाल के दोस्त रंजीत ने बताया कि मोबाइल फोन मिल गया, उसकी सिपुर्दगी के बदले चार हजार रुपये देने होंगे। रुपये देने से मना करने पर रंजीत धमकाने लगा कि पुलिस को परेशान किया, अब कार्रवाई होगी।
बाद में प्रेमपाल ने भी यही बात दोहराई तो दबाव में आकर रुपये देने पड़े। बातचीत में प्रेमपाल ने स्वीकार लिया कि थाने के कंप्यूटर आपरेटर जावेद से फोन के बारे में जानकारियां मिलती हैं। इसकी शिकायत एसएसपी अंकिता शर्मा से की तो उन्होंने जांच बैठाई। उसमें पता चला कि कंप्यूटर ऑपरेटर सिपाही जावेद ने सीईआइआर पोर्टल की आईडी-पासवर्ड प्रेमपाल को दे दिया।
पोर्टल पर मोबाइल नंबर की इंट्री करने पर उसकी लोकेशन आदि ब्योरा पता चलता रहता है। इसी के सहारे प्रेमपाल मालूम करता कि गुम मोबाइल फोन आसपास किस गांव में, कौन चला रहा। वह रंजीत को भेजकर धमकी दिलाता था कि चोरी का मोबाइल फोन चलाने पर जेल होगी।
इस बहाने फोन चलाने वाले व्यक्ति से वसूली करता, उससे फोन भी बरामद कर सिपाही को दे देता था। जिन लोगों का मोबाइल बरामद होता, उनसे भी रुपये लिए जाते। इस वसूली की 50 प्रतिशत रकम सिपाही को पहुंचती थी, शेष में प्रेमपाल व रंजीत बंटवारा करते थे।
