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बदायूं मेडिकल कॉलेज की बदलेगी सूरत: 646 करोड़ खर्च के बाद भी जर्जर थी बिल्डिंग, अब शासन को भेजी गई मरम्मत की DPR

Published: Thu, 24 Sep 2026 09:25 PM (IST)

बदायूं मेडिकल कॉलेज की 646 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद जर्जर हालत को सुधारने के लिए प्रशासन ने विस्तृत ...और पढ़ें

राजकीय मेडिकल कालेज। जागरण अर्काइव

राजकीय मेडिकल कालेज। जागरण अर्काइव

HighLights

  1. काॅलेज प्रशासन ने खामियों को कराया चिह्नित, बिल्डिंग की हकीकत आई सामने, अब जल्द मरम्मत की उम्मीद

जागरण संवाददाता, बदायूं। करीब 646 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद राजकीय मेडिकल कालेज का निर्माण पूरा नहीं हो पाया। छह साल से अधूरे पड़े निर्माण की वजह से इसकी हालत और ज्यादा खराब हो गई। लगातार बिगड़ती इमारत को देखते हुए कालेज प्रशासन ने उसकी मरम्मत काे एक प्लान तैयार किया है।

प्रशासन ने पूरे कैंपस की खामियों को चिन्हित कर एक विस्तृत डीपीआर बनाकर शासन को भेज दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि शासन से मंजूरी मिलते ही मरम्मत का काम शुरू हो जाएगा।

मेडिकल कालेज का निर्माण वर्ष 2014-15 में शुरू हुआ था और 2024 तक पूरा होना था लेकिन कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम ने वर्ष 2018 में पुरानी दरों पर काम करने से इनकार कर दिया।

रेट रिवीजन को लेकर मामला हाईकोर्ट में चला गया और तब से कालेज में काम ठप पड़ा है। अभी तक कालेज शासन को हैंडओवर भी नहीं हो पाया है। इसकी वजह से शासन स्तर से मरम्मत का बजट भी नहीं मिल पा रहा है। इधर बनी हुई बिल्डिंग धीरे-धीरे जवाब देने लगी है।

यहां जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है। इमरजेंसी, रेडियोलाजी, दवा स्टोर, अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर और जनरल वार्डों में फाल्स सीलिंग टूटकर लटक रही है। कई जगह प्लास्टर उखड़ा है, पाइप टूटे हैं, छतों से पानी टपकता है और कई कमरों में खिड़की-दरवाजे तक नहीं हैं।

मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि वार्डों में भर्ती मरीजों को हमेशा यह डर सताता है कि कहीं सीलिंग का पैनल सिर पर न गिर जाए। स्टाफ भी इसी जर्जर व्यवस्था में काम करने को मजबूर है।

इसी बदहाली को देखते हुए प्राचार्य डा. शिव कुमार ने पहल की है। उन्होंने बताया कि पूरे कैंपस का सर्वे कराया गया है। जहां-जहां मरम्मत की जरूरत है, उसे डीपीआर में शामिल किया गया है।

इसमें टूटी सीलिंग, खराब प्लंबिंग, अधूरा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, अधूरी लिफ्टें, अधूरे टावर, नर्सिंग और इंटर्न हास्टल के बचे हुए काम और आंतरिक फिनिशिंग का काम शामिल है।

कालेज प्रशासन का कहना है कि अगर यह डीपीआर पास हो जाती है तो कम से कम मौजूदा बिल्डिंग को सुरक्षित और मरीजों के लायक बनाया जा सकेगा। इससे बड़े हादसे का खतरा भी टलेगा और मेडिकल कालेज की सूरत कुछ बेहतर दिखने लगेगी।

सपना 2012 का, अधूरा है अब तक

राजकीय मेडिकल कालेज की सौगात वर्ष 2012-13 में सपा सरकार में ही मिल गई थी। उझानी रोड पर नौशेरा में 100 एकड़ जमीन पर इसका निर्माण शुरू हुआ।

शुरुआती लागत 545.21 करोड़ तय हुई थी, जो अब बढ़कर 646 करोड़ हो चुकी है। यानी 100.90 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च हो गए, फिर भी 25 प्रतिशत काम अभी बाकी है।

यहां 2016 में ओपीडी और 2017 में इमरजेंसी शुरू हो गई थी। अभी तक पांच टावरों में से दो पूरे नहीं हो पाए हैं। यहां 12 लिफ्टों में से कई लगी नहीं हैं। 

 

राजकीय मेडिकल कालेज की हालत काफी खराब है और इससे काफी दिक्कतें भी आ रही हैं। संस्था द्वारा निर्माण अभी शुरू कराने की कोई उम्मीद भी नहीं है। इससे कालेज की खामियों को देखा और डीपीआर तैयार कराया गया। उसे शासन को भेज दिया गया है।

- डाॅ. शिव कुमार, प्राचार्य मेडिकल कालेज


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