इस जिले की अस्पतालों से अक्सर गायब हो जाते हैं डॉक्टर, एक तो छह महीने से लापता, CMO बोले- अब वो जमाना नहीं
पीएचसी-सीएचसी में डॉक्टर अक्सर गायब रहते हैं, एक चिकित्सक छह माह से लापता है और अन्य मनमर्जी से छुट्टी पर रहते हैं, जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है।
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प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
जागरण संवाददाता, बदायूं। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था का बुरा हाल है। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से डॉक्टर और कर्मचारी जब चाहे गायब हो जाते हैं और जब चाहे ड्यूटी पर पहुंच जाते हैं। इसका परिणाम उन गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, जो इलाज के हकदार हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैदपुर पर तैनात डॉ. विजेंद्र भैरवा पिछले छह माह से लापता हैं। उन्होंने विभाग को कोई सूचना तक नहीं दी। छह माह तक विभाग को उनकी कोई जानकारी नहीं मिली।
शुरुआत मई में वह अचानक ड्यूटी पर लौटे और फिर नौ मई से मेडिकल लीव पर चले गए। यह अकेला मामला नहीं है। कई अन्य डॉक्टर भी मनमर्जी से ड्यूटी कर रहे हैं। कब गायब होंगे और कब आएंगे, इसकी जानकारी विभाग को भी नहीं रहती।
पिछले दिनों बिसौली तहसील के एक नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात महिला डॉक्टर एक माह तक गायब रहीं, विभाग को भनक तक नहीं लगी। सीएमओ के अचानक निरीक्षण पर इसका पता चला।
इसके अलावा सीएचसी आसफपुर के आठ, बिसौली के तीन और वजीरगंज के चार कर्मचारी एक साथ गायब मिल चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते जिले में डेंगू, मलेरिया और स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियां पैर पसार रही हैं।
विवादों में घिरे डॉ. अवधेश राठौर कर रहे जेल में ड्यूटी
शासन ने जिन डॉ. अवधेश राठौर के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा है, वह इस समय जिला कारागार में ड्यूटी कर रहे हैं। जेल अस्पताल में बंदियों का इलाज करने के साथ-साथ पोस्टमार्टम ड्यूटी भी संभाल रहे हैं।
दरअसल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कादरचाैक के एक मामले को लेकर शासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। चर्चा है कि एक जगह उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है, तो दूसरी जगह उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा गया है, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
इस पूरे मामले पर सीएमओ डॉ. विकास शर्मा का कहना है कि अभी तक उनके पास शासन से कोई आधिकारिक पत्र नहीं आया है। जब तक शासन से लिखित आदेश नहीं आ जाता, तब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करना उचित नहीं है।
महिला अस्पताल में डॉक्टर का खेल, ड्यूटी से गायब, हाजिरी पूरी
महिला अस्पताल में पैथोलाजी की जिम्मेदारी संभालने वाली महिला डॉक्टर अक्सर ड्यूटी से नदारद रहती हैं। कई-कई दिन तक अस्पताल नहीं आतीं, लेकिन हाजिरी रजिस्टर में उनकी उपस्थिति रोज लग रही है।
एक कर्मचारी ने बताया कि पैथोलाजी जांच के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं की तमाम समस्याएं रहती हैं। डॉक्टर के न आने से उनकी जांचें लंबित हो जा रही हैं और मरीजों को बाहर महंगे दामों पर जांच करानी पड़ रही है।
पिछले दिनों ''दैनिक जागरण'' में इस लापरवाही की खबर प्रकाशित होने के बाद डॉक्टर कुछ दिन समय पर आने लगी थीं लेकिन अब फिर पुराना ढर्रा शुरू हो गया है। डॉक्टर रोजाना ड्यूटी पर नहीं आ रहीं, जबकि कागजों में सब कुछ ठीक दिखाया जा रहा है।
अब वो जमाना नहीं है कि डॉक्टर ड्यूटी पर न आएं और उनके खिलाफ कार्रवाई न हाे। डॉक्टर को रोजाना आना पड़ेगा और मरीजों को भी देखना पड़ेगा। अगर कोई लापरवाही देगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. विकास शर्मा, सीएमओ
