आलू को बना दिया सरसों, धान को बाजरा; लेखपालों की लापरवाही से सरकारी अनुदान और बीमा दावे खारिज
बदायूं में चक्रवातीय वर्षा से हुए फसल नुकसान के सर्वे में लेखपालों ने बड़ी लापरवाही की है, जिससे किसानों को ...और पढ़ें

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HighLights
किसानों के अनुदान और मुआवजा मांगने के दौरान गलत सर्वे का खुलासा, अब तहसीलों के चक्कर लगा रहे किसान
उमेश राठौर, बदायूं। जिले में बीते दिनों हुई चक्रवातीय वर्षा से हुए फसल के नुकसान के सर्वे के नाम पर बड़ा खेल हो गया। तहसीलों से कराए गए सर्वे में लेखपालों ने खेत में जाना तो दूर, घर बैठे-बैठे ही फसलों की अदला-बदली कर दी। नतीजा, कागजों पर धान के खेत में बाजरा लहलहा रहा है और आलू के खेत में सरसों। किसानों का आरोप है कि पूरे जिले में यही हाल है।
सर्वे टीम खेत पर आई ही नहीं। कंप्यूटर पर बैठकर मनमर्जी से आंकड़े भर दिए। जब किसान अपनी खसरा-खतौनी निकलवाने पहुंचे तो होश उड़ गए। खेत में खड़ी धान की फसल कागजों में बाजरा बन चुकी थी।
इस फर्जीवाड़े की सीधी मार किसानों पर पड़ी है। गलत रिपोर्ट के चलते वह सरकारी खरीद, मुआवजा और अनुदान तीनों से वंचित हो गए हैं। फसल खराब होने पर बीमा कंपनियां यही गलत खसरा दिखाकर दावा खारिज कर रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि तहसील में शिकायत करो तो लेखपाल कहते हैं कि जैसा बताया गया वैसा भर दिया। अब सवाल यह है कि जब रकबा ही गलत होगा तो उत्पादन का आंकड़ा सही कैसे आएगा और सरकार खरीद किस आधार पर करेगी।
किसानों ने बताया कि जब उन्होंने खसरा-खतौनी निकलवाई तो उसमें दर्ज फसल देखकर चौंक गए। कई किसानों के खेत में धान लगा था लेकिन खसरा में बाजरा दर्ज था।
इसी तरह आलू के खेत में सरसों लिखी मिली। इस गड़बड़ी से जिले में फसलों के उत्पादन के आंकड़ों में भारी अंतर आने की आशंका है, जिसका असर सरकारी खरीद और समर्थन मूल्य पर भी पड़ेगा। यह समस्या जिले के अधिकतर गांवों में देखी जा रही है।
किसान लगातार तहसील और लेखपाल के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। फिलहाल राजस्व अभिलेखों में दर्ज रकबे को ही मान्य माना जा रहा है, जबकि किसानों के मुताबिक वह भी फर्जी है। किसानों ने डीएम से पूरे सर्वे को निरस्त कर दोबारा भौतिक सत्यापन कराने और लापरवाह लेखपालों पर कार्रवाई की मांग की है।
ये है मुआवजे का प्रावधान
प्राकृतिक आपदा आंधी तूफान बरसात से जो नुकसान हुआ है, उसके बारे में किसान को समय पर राजस्व विभाग के अधिकारियों या लेखपाल, कानूून-गो को सूचना देनी होगी। कृषि विभाग को भी इसके बारे में बताना होगा।
उसके बाद राजस्व विभाग और कृषि अधिकारी मौके पर जाकर या डिजिटल सर्वे के माध्यम से उनके नुकसान का आंकलन करेंगे। जांच पूरी होने के बाद नुकसान के हिसाब से धनराशि तय की जाएगी और सीधे किसानों के खाते में भेज दी जाएगी।
किसानों की बात
हमारे 22 बीघा खेत में आलू की फसल थी। आलू पर कम से कम 50 रुपये अनुदान मिलता है लेकिन जब खसरा निकलवाया तो उसमें सरसों दर्ज थी। इससे हमें अनुदान नहीं मिला। कई बार तहसील के चक्कर लगाने पर आश्वासन मिला है कि जो गलती हुई है उसमें सुधार कराया जाएगा। - संजीव कुमार सिंह, किसान
हमारे खेत में भी आलू की फसल थी। उसमें भी सरसों की फसल लिख दी गई, जबकि हमने अपने खेत में सरसों की फसल की ही नहीं थी। सर्वे करने वाले लेखपाल ने घर में बैठकर सर्वे किया है। उनकी लापरवाही का परिणाम किसान भुगत रहे हैं। इससे किसानाें को भारी नुकसान हुआ है। - शिशुपाल सिंह, किसान
हमने अपने खेत में गन्ना की फसल की थी लेकिन सर्वे करने वाले लेखपाल ने गन्ना की जगह बाजरा लिख दिया। या तो लेखपाल सर्वे करने ही नहीं आया या फिर उसने अपने घर में बैठकर सर्वे लिख दिया लेकिन इस गलती का सबसे बड़ा नुकसान किसानों को झेलना पड़ रहा है। - मुनीश कुमार सिंह, किसान
हमारे खेत में गन्ना की फसल थी लेकिन लेखपाल ने बाजरा लिख दिया। जबकि हमने कई साल से बाजरा की फसल ही नहीं की है। हम मुख्य रूप से गेहूं धान गन्ना आदि फसलों को करते आ रहे हैं। लेखपाल ने यह गलत आंकड़े भर दिए हैं। इससे कृषि व्यवस्था बिगड़ गई है। - विकास कुमार सिंह, किसान
इसमें देखना यह है कि लेखपालों ने सर्वे किस तरह से किया है। अगर सेटेलाइट के माध्यम से किया है तो गलती करना आसान नहीं होगा। उससे तत्काल पता चल जाएगा कि किसान के खेत में कब कौन सी फसल थी। हम किसानों को नुकसान या मुआवजा देने से इन्कार नहीं कर रहे हैं। वह कम से कम अपनी शिकायत लेकर आएं और उसमें अपना गाटा संख्या लिखकर लाएं, जिससे उसकी जांच कराई जा सके।
- अवनीश कुमार राय, डीएम
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