जेएनएन, बदायूं : किसानों के लिए केंद्र सरकार के साथ प्रदेश सरकार ने भी खजाने का मुंह खोल दिया है। गांव-गांव पशुशाला और पशु आश्रय स्थल बन जाने से छुट्टा पशु फसल बर्बाद नहीं कर पाएंगे। किसानों को केंद्रित बजट पेश किए जाने से किसानों ने खुशी तो जताई है, लेकिन बिचौलियों का खेल खत्म कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि पहले से ही सरकार ने किसानों की सहूलियत में कमी नहीं छोड़ी थी। अब जो किया है वह एक दायरे से बढ़कर किया है लेकिन बिचौलिए और माफिया हावी होते हैं तो साधारण किसान का पतन हो जाता है। इसलिए कम से कम इन माफिया पर सख्ती बरती जाए तो किसानों को और राहत मिल सकेगी। फोटो - 7 बीडीएन - 24

गेहूं की खरीद के लिए प्रदेश में छह हजार केंद्र खोले गए हैं। केंद्र भले ही कम हों लेकिन खरीद के वक्त घटतौली और बिचौलियों से किसानों को बचाना सरकार की प्राथमिकता में शामिल होना जरूरी है। सरकार को चाहिए कि भले ही केंद्रों की संख्या कम करे लेकिन बिचौलिए हावी न हों, ऐसी व्यवस्था की जाए।

- र¨वद्र ¨सह, किसान नेता

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किसानों के लिए उर्वरक का वितरण किया जा रहा है। यह अच्छी बात है, 77.25 मीट्रिक टन उर्वरक बांटे भी जाएंगे। यह भी बजट में शामिल है लेकिन अभी तक खाद और उर्वरकों के लिए किसानों को जो लाठियां खानी पड़ीं वह कहां का न्याय है। जरूरी है कि व्यवस्था में संशोधन किया जाए, ताकि न भीड़ हो और न ही भगदड़ के हालात बनें।

- गंगाराम सागर, किसान

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भंडारण की व्यवस्था कोई नई बात नहीं है। यह परंपरा हमेशा से चली आ रही है। जरूरत तो भंडारण के दाम में कमी की थी। क्योंकि फसल रखने के बदले कोल्ड स्टोर संचालक किसानों से मोटी रकम वसूलते हैं। जबकि उन्हें न्यूनतम दर पर भंडारण का आदेश जारी होता तो किसान राहत महसूस करते।

- रामवीर ¨सह, किसान फोटो - 7 बीडीएन - 5

कृषि क्षेत्र में विकास के लिए सरकार ने 892 करोड़ रुपये देने का प्राविधान दिया है। जबकि जमीनों पर लगातार कब्जे हो रहे हैं। आबादी खेतों तक पहुंचने लगी है। ऐसे में भला कृषि का विकास कैसे संभव है। केवल संसाधनों में विकास किया जा सकता है लेकिन जब जमीन ही नहीं बचेगी तो संसाधन कहां से चलेंगे। वहीं गन्ने का पुराना बकाया मिल जाए तो किसान वैसे ही खुश हो जाते।

- राजेश सक्सेना, किसान नेता

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Posted By: Jagran

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