बिसौली : श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन प्रभु के तारण स्वरूप की चर्चा की गई। स्तनपान के समय प्रभु कृष्ण ने जब पूतना के प्राण खींचने शुरू किए तो वह चिल्लाने लगी। प्रभु श्री कृष्ण ने कहा कि जिसे मैं पकड़ लेता हूं, उसे फिर छोड़ता नहीं।

नगर के श्री प्राचीन रामलीला मैदान में चल रही श्रीमद् भागवत कथा सुनाते हुए देवी चित्रलेखा जी ने प्रभु के तारण स्वरूप का सुंदर ढंग से बखान किया। कहा कि प्रभु ने मारने आयी पूतना, तृणावृत, वकासुर को मारकर उसे अपने धाम में पहुंचा दिया। कहा कि प्रभु से जिस रूप में जुड़ो, प्रभु उस भक्त को भवसागर से पार कर देते हैं। उन्होंने धार्मिक जगत के हुए भौतिकरण पर कटाक्ष करते हुए कहा कि धन की लालसा से शुरू की गई कथा मनोरंजन तो कर सकती है, लेकिन यह जीवन की दशा और दिशा नहीं बदल सकती है। जीवन में परिवर्तन तो भक्ति भाव सुनाई गई कथा ही कर सकती है। उन्होंने गाय की महिमा सुनाते हुए कहा कि हम सभी गाय को माता कहते हैं, और उन्हें घर में रखने की जगह घूमने के लिए बाहर छोड़ दिया। प्राचीनकाल में तो गाय मरीज का उपचार भी करती थी। यही मां यशोदा ने भी किया। पूतना को मारने के बाद मां यशोदा ने बालरूप कृष्ण का गोमूत्र में स्नान कराया और गाय की पूंछ से नजर उतारी। उन्होंने गाय के प्रति अपनत्व भाव रखने के लिए प्रेरित किया। इस मौके पर मनोज यादव, अनुजकांत मिश्र, पवन गुप्ता, प्रदीप कुमार, हिमांशु सक्सेना, प्रदीप शर्मा, सतीश माथुर, नंद कुमार, सुरेशचंद्र, महेंद्र प्रताप यादव, रजत साहनी, गोपाल अग्रवाल, अंशु शर्मा, अर्चना यादव, संगीता रस्तोगी, मधु शर्मा, राधा रानी, चिराग वाष्र्णेय, अंजू मिश्रा आदि मौजूद रहे।

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श्रीमद् भागवत मंच से दिया स्वच्छता का संदेश

कथावाचक देवी चित्रलेखा जी ने श्रीमद् भागवत मंच से स्वच्छता का संदेश दिया। कहा कि सीमा पर जवान अपने देश की खातिर प्राण न्योछावर कर रहे हैं, तो हम अपने देश को स्वच्छ रखने का संकल्प भी नहीं ले सकते। उन्होंने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने की भी नसीहत दी।

Posted By: Jagran

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