बदायूं : कृषि विभाग सिस्टम आफ राइस इंटेंसीफिकेशन (एसआरआई) पद्धति को बढ़ावा देगा। इस पद्धति से कम बीज, कम पानी, कम लागत में ज्यादा उत्पादन लिया जा सकता है।

धान की फसल के लिए सामान्यता किसान परंपरागत तरीका ही अपनाते हैं। इसमें बीज ज्यादा लगने के साथ ही लागत भी अधिक आती है। कृषि विभाग कम लागत में अधिक उत्पादन पर जोर दे रहा है। इसके लिए एसआरआई पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है। कोशिश यह है कि किसान वैज्ञानिक तरीके से खेती करके अपनी आय बढ़ाएं। डीडीए अनिल कुमार तिवारी ने बताया है कि इस पद्धति से धान की फसल के लिए एक हेक्टेयर के लिए 5-6 किलो बीज की आवश्यकता होती है। जबकि जबकि सामान्य तरीके से धान की पौध डालने पर तीस किलो बीज लगता है। एसआरआई तकनीक से खेती में 8-10 दिन की पौध की रोपाई होती है और परंपरागत खेती में 25-30 दिन की पौध लगाई जाती है। एसआरआई में पौधे की दूरी 25 सेमी रखते हुए एक वर्ग मीटर में 16 पौधे लगाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि इसमें नर्सरी तैयार करते समय सावधानी बरतना पड़ती है। इसके लिए खेत को विशेष तौर पर तैयार किया जाता है। इस पद्धति की एक खास बात यह है कि पौध की रोपाई करने के लिए खेत में पानी भरने की आवश्यकता नहीं है। खेत कीचड़नुमा होना चाहिए। यानि इससे पानी की बचत होती है।

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