जागरण टीम, आजमगढ़ : विजयदशमी के दिन पुरानी कोतवाली समेत कई स्थानों पर कहीं रावण का वध करने के बाद पुतला दहन किया गया, तो कई स्थानों पर रामलीला का दूसरा-तीसरा दिन था। बिद्रबाजार में नारद मोह का मंचन किया गया, जबकि फूलपुर और बरहतिर जगदीशपुर में विभीषण ने रावण की नाभि में अमृत का भेद बताया तो राम ने उसका वध कर दिया।

बिद्राबाजार : बाजार में नारद मोह के मंचन ने लोगों को मोहा। नारद ने पृथ्वी लोक पर एक मनमोहक स्थान देखकर तपस्या प्रारंभ की। उनकी तपस्या से घबराकर इंद्र ने कामदेव को तपस्या भंग करने के लिए भेजा। कामदेव को देख नारद प्रसन्न हुए और यहीं से उनके मन में अहंकार उत्पन्न हुआ। उन्होंने इसकी सूचना शिव को देने के साथ कहा कि मैंने कामदेव को जीत लिया। शिव ने समझाया कि नारद जी आप तपस्वी हैं। यह बात कभी भूल से भी भगवान विष्णु से मत बताइएगा, लेकिन नारद ने विष्णु से भी बता दिया।भगवान ने माया की नगरी बनाकर विश्व मोहिनी का स्वयंवर रचाया। नारद जी भगवान का चेहरा मांगने पहुंच गए और स्वयंवर में जाकर बैठ गए। इसी बीच विष्णु ने स्वयंवर में आकर विश्वमोहिनी का वरण कर लिया। नारद ने विष्णु को श्राप दे दिया।

फूलपुर : रामलीला मैदान में राम-रावण युद्ध देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी।इससे पहले भगवान राम की झांकी वानरी सेना के साथ नगर में निकाली गई। रावण वध के बाद उसके पुतले का दहन किया गया। इसी के साथ पूरा इलाका राम के जयकारे से गूंज उठा।उसके बाद राम की विजय रथयात्रा निकाली गई।जगह-जगह लोगों ने श्रीराम की आरती उतारी।

जहानागंज : बरहतिर जगदीशपुर की रामलीला रावण वध और पुतला दहन के साथ संपन्न हो गई।रावण ने जब देखा कि उसके कुल में अब कोई नहीं बचा है तो पातालपुरी के राजा अहिरावण का आह्वान किया।रावण के निर्देश पर अहिरावण ने राम और लक्ष्मण का अपहरण किया और मां के दरबार में उनकी बलि चढ़ाने की तैयारी करने लगा, लेकिन उसी समय हनुमान ने अहिरावण का वध कर दिया। अहिरावण वध के बाद रावण स्वयं मैदान में उतरा और राम के हाथों मारा गया।

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